जुलाई के बाद स्वच्छता सर्वेक्षण की आएगी टीम, सफाई व्यवस्था पटरी से उतरी

जुलाई के बाद स्वच्छता सर्वेक्षण की आएगी टीम, सफाई व्यवस्था पटरी से उतरी
जबलपुर। स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 के तहत सर्वेक्षण करने वाली केंद्रीय टीम का आना लगातार टल रहा है। नगर निगम के अधिकारियों की माने तो अब 18 जुलाई के बाद केंद्रीय स्वच्छता टीम कभी शहर पहुंचकर सर्वेक्षण शुरू कर सकती है। इधर घाटा बताकर डोर टू डोर कचरा कलेक्शन करने वाली एस्सल कंपनी के हाथ खड़े कर दिए जाने और वर्षा का सीजन होने से शहर की स्वच्छता व्यवस्था फिर पटरी से उतरने लगी है। हाल ये हैं कि घरों से अब नियमित कचरे का उठाव नहीं हो रहा है। अधिकांश वार्डों में या तो कचरा गाड़ी पहुंच नहीं रही या तीन दिन में एक बार ही पहुंच रही है। कचरा गाडियों के न आने से लोग अब घरों के आस-पास कचरा फेंकने लगे है जिससे शहर में एक बार फिर अस्थाई कूड़ादान नजर आने लगे हैं। सोमवार को भी शहर के कई क्षेत्रों में सड़क किनारे कचरे के ढेर लगे रहे। जानकारों की माने यदि ऐसे ही हालात रहे और स्वच्छता सर्वेक्षण टीम पहुंच गई तो इस बार स्वच्छता की रैकिंग में जबलपुर को मुंह की खानी पड़ सकती है। विदित हो कि स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 के तहत इस बार 7,500 अंकों की जगह 9,500 अंकाें की परीक्षा होगी।

177 वाहनों से नगर निगम उठवा रहा कचरा

विदित हो कि नगर निगम ने शहर के सभी 79 वार्डों के घरों से रोजाना कचरा एकत्र करने यानी डोर टू डोर कचरा कलेक्शन का ठेका एस्सल कंपनी को दिया था। मौजूदा दौर में कंपनी द्वारा द्वारा डोर टू डोर कचरा कलेक्शन ठीक से न करनके कारण नगर निगम को अपने 177 कचरा वाहन लगाकर घरों से कचरा उठवाना पड़ रहा है। जबकि एस्सल करीब 190 कचरा वाहन ही उपयोग कर रहा है। जबकि अनुबंध शर्तो के अनुसार एस्सल को ही अपने समस्त मानव व मशनीरी संसाधन का उपयोग करना है। हालांकि नगर निगम का दावा है कि अपने संसाधनों का उपयोग करने के एवज में एस्सल को हर माह दिए जाने वाले करीब एक करोड़ 80 लाख रुपये में कटौती की जा रही है।

ऐसे बिगड़े सफाई के हाल

  • - घरों से कचरा उठाने वाले अधिकांश वाहनों में अब नहीं सुनाई देते जिंगल
  • - अधिकांश वार्डों में नियमित रूप से नहीं उठ रहा कचरा, कचरा वाहन तीन दिन में एक बार पहुंच रहे
  • - सड़कों में जगह-जगह नजर आ रहे कचरे के ढेर
  • - निगमायुक्त के आदेश के बाद भी मैदानी निरीक्षण नहीं कर रहे विभागीय अधिकारी

स्वच्छता के इन मानकों से तय होगी रैकिंग

  • - सभी प्लांटों का उचित तरीके से संचालन तथा रखरखाव
  • - गीले-सूखे कचरे का एकत्रीकरण, निष्पादन
  • - जलसंरक्षण, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से गंदे पानी का उपचार भी अनिवार्य है
  • - थ्री आर यानी रिड्यूज, री-साइकिल और रीयूज की गतिविधियां जरूरी


पिछले तीन वर्षों की ऐसी थी रैंकिंग

वर्ष - रैंकिंग

2019 - 25वें स्थान पर

2020 - 17वें स्थान पर

2021 - 20वें स्थान पर

2022 - 22वें स्थान पर

इनका कहना है

कंपनी प्रतिनिधि को कामकाज में सुधार लाने कहा गया है। सफाई व्यवस्था न बिगड़े इसलिए नगर निगम अपने 177 कचरा वाहनों से कचरा कलेक्शन करवा रहा है इसके एवज में एस्सल को किए जाने वाले भुगतान से कटौती की जाती है। सर्वेक्षण टीम के आगमन के पूर्व व्यवस्था दुरुस्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

-भूपेंद्र सिंह, स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम


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