भोपाल। शहर में बीते एक माह से पांच हजार से अधिक स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं। जिससे विभिन्न क्षेत्रों में सड़क, चौराहे और कालोनियों में अंधेरा छाया है। लेकिन निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए निगम अधिकारी इनका सुधार नहीं करवा रहे हैं।
बता दें कि शहर में नगर निगम द्वारा स्ट्रीट लाइट लगाने, इनके संचालन और मरम्मत की जिम्मेदारी पब्लिक प्राइवेट पार्नरशिप (पीपीपी) मोड पर निजी कंपनी को सौंपी गई है। इसके तहत निजी कंपनी को शहर में लगी 32 हजार 276 इलेक्ट्रिक फिटिंग (सोडियम वेपर लैंप) को स्मार्ट एलईडी लाइट्स से बदलना है। इसके बदले कंपनी को स्ट्रीट लाइट लगने से बिल में आने वाली कमी का 25 प्रतिशत राशि का भुगतान किया जाना है। अब तक ऐसी 20 हजार 500 लाइट्स को बदला जा चुका है। इन सभी लाइट्स को स्मार्ट सिटी के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से इंटीग्रेट करना है, ताकि इन्हें कंट्रोल किया जा सके, जो अब तक नहीं हुआ है। अहम बात ये है कि 640 करोड़ रुपए वाले इस प्रोजेक्ट में निगम और स्मार्ट सिटी कंपनी का एक धेला भी खर्च नहीं हुआ है, पूरा पैसा कंपनी लगा रही है।
इसलिए नहीं कराना चाहते स्ट्रीट लाइट का सुधार
मान लें नगर निगम का हर महीने स्ट्रीट लाइट बिजली बिल एक करोड़ रुपए आता है। लेकिन एलईडी लाइट लगने के बाद बिल 50 लाख रुपए महीना आया, तो जो 50 लाख रुपए बिल में कमी आई है, उसका 25 फीसदी यानी 25 लाख रुपए कंपनी को भुगतान किया जाएगा। स्ट्रीट लाइट बिल में जितनी कमी आएगी उतना ज्यादा कंपनी को फायदा होगा। इसी वजह शहर में अब तक लगाई गई 20 हजार स्ट्रीट लाइट्स में पांच हजार लाइटें बंद रहती हैं। जबकि इतनी ही लाइटें महीने में 10 से 12 दिन बंद रहती हैं।
इन स्थानों पर बंद हैं स्ट्रीट लाइट
नर्मदापुरम रोड, रत्नागिरी से भानपुर रोड, पिपलानी बी सेक्टर से खजूरी कला मार्ग, महात्मा गांधी से अवधपुरी, गोविंदपुरा थाना से सिक्योरिटी लाइन, करोंद, चूनाभट्टी, साकेत नगर, बागसेवनिया से कटारा हिल्स मार्ग, बर्रई, बावड़िया कला समेत अन्य क्षेत्रों स्ट्रीट लाइटें बंद हैं।
इनका कहना है
तकनीकी खराबी होने पर ही स्ट्रीट लाइटें बंद होती हैं। जहां लाइट बंद हैं, उनका निरतंर सुधार किया जा रहा है।
- आशीष श्रीवास्तव, इंजीनियर, नगर निगम











