समग्र विकास का दावा करते मुख्यमंत्री मोहन यादव

समग्र विकास का दावा करते मुख्यमंत्री मोहन यादव
अपनी-अपनी सरकारों का दो साल का कार्यकाल पूरा होने पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव अपनी-अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए दावा कर रहे हैं कि नक्सल समस्या के खात्मे के साथ ही प्रभावित क्षेत्रों तक विकास पहुंचाना हमारा लक्ष्य है। मुख्यमंत्री साय का दावा है कि सरकार के गठन के दूसरे दिन ही 18 लाख से अधिक जरुरतमंद परिवारों को प्रधानमंत्री आवास की स्वीकृति दी गयी और किसानों के लिए 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान की खरीदी कर किसानों के लिए खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया गया है। 70 लाख माता-बहनों को प्रतिमाह 1000 रुपये की सहायता दी जा रही है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ  मोहन यादव तो एक कदम आगे बढ़कर दावा कर रहे हैं कि जैसे नक्सलवादियों का सफाया किया वैसे ही अब नशा माफिया पर शिकंजा कसेंगे। मध्यप्रदेश में 32 लाख करोड़ के जो निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं उससे 23 लाख लोगों को रोजगार सुलभ होगा।
यदि डॉ मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने सही मायने में नशे का अवैध कारोबार करने वालों पर पूरी दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ प्रहार कर दिया तो फिर इससे न केवल हमारी आने वाली पीढ़ी का भविष्य संवर जायेगा अपितु नशाखोरी के धंधे पर भी एक बड़ी सीमा तक रोक लग सकेगी। अपनी सरकार के कार्यकाल के दो वर्ष पूरे होने के एक दिन पूर्व ही मीडिया के समक्ष सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए डाॅ. यादव ने कहा कि जैसे हमने नक्सलियों का सफाया किया वैसे ही नशे का नेटवर्क भी ध्वस्त करेंगे और यह तभी संभव होगा जबकि समाज का पूरा साथ मिलेगा। डाॅ. यादव का यह कहना परिस्थितियों का सही आंकलन ही पेश करता है क्योंकि जब तक नशाखोरी के खिलाफ चलाये जा रहे अभियान में समाज और विशेषकर युवा पीढ़ी का समर्थन व सहयोग नहीं मिलेगा तब तक कोई भी सरकार इस पर पूरी तरह रोक नहीं लगा सकती। जो लोग नशाखोरी के आदी हो गये हैं उन्हें भी इस बुरी आदत को छोड़ने के लिए मानसिक रुप से तैयार होना होगा। नशे के अवैध कारोबार करने वालों को बक्शा नहीं जायेगा, कहते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव यह कहने से नहीं चूके कि अक्टूबर 2024 में गुजरात एटीएस और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने मध्यप्रदेश में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया था। भोपाल में मादक पदार्थ बनाने वाली फैक्ट्री से 1800 करोड़ रुपये से अधिक की ड्रग्स बरामद की गयी थी, दो आरोपी भी दबोचे गये थे। इस साल अगस्त में फिर राजस्व खुफिया निदेशालय ने भोपाल में 92 करोड़ रुपये की एमडी ड्रग्स पकड़ी थी। नवम्बर माह के पहले सप्ताह में धार के ऐसे युवक को इंदौर क्राइम ब्रान्च ने पकड़ा जो आनलाइन आर्डर पर इंदौर में एमडी ड्रग्स की सप्लाई करता था। छिंदवाड़ा में 63.62 ग्राम एमडी ड्रग्स के साथ तीन युवक पकड़े गये थे। ऐसी कार्रवाइयां होती रहती है फिर भी नेटवर्क ध्वस्त नहीं हो रहा है ऐसे में मोहन यादव सरकार आगामी तीन वर्ष में नशे का नाश करेगी, यह भी डाॅ. मोहन ने तय किया है।
     मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश तेजी से आये इसके लिए डाॅ. मोहन यादव ने सरकार की नीतियों में भी कुछ परिवर्तन कर उन्हें उद्योग फ्रेंडली बनाया है। अभी तक 8.57 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर अमल भी आरम्भ हो गया है। उद्योगों में सबसे ज्यादा निवेश मालवा एवं राजधानी के आसपास के क्षेत्रों में हो रहा है। जीएसआई सहित ज्यादातर समिट में प्रदेश के कुछ जिलों को ही बड़े निवेश प्रस्ताव मिल रहे हैं, इनमें इंदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा, शहडोल, सागर, उज्जैन, नर्मदापुरम, ग्वालियर, मुरैना शामिल हैं। निवेश के लगभग 84 प्रस्ताव मिले हैं इनमें 32 इंदौर और 22 भोपाल को मिले हैं, जबलपुर को 9, रीवा और शहडोल को सात-सात उज्जैन को चार, सागर को तीन नर्मदापुरम को छः तथा चम्बल में मुरैना को और ग्वालियर को एक-एक प्रस्ताव मिला है। डाॅ यादव का कहना है कि अब इन सब प्रस्तावों को जमीन पर उतारेंगे। डाॅ यादव यह भी कह रहे हैं कि कोयम्बटूर के उद्योगपतियों ने उन्हें बताया कि जिन भागों से उनके कपड़ा उद्योग को गति मिलती है वह कपास मध्यप्रदेश से आता है। इसलिए हमने तय किया है कि प्रदेश के कपास से प्रदेश में ही धागा बनेगा और कपड़ा उद्योग के क्षेत्र में हम आगे बढ़ेंगे।
और यह भी
      डाॅ. मोहन यादव सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर सरकार की घेराबंदी करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार , हेमंत कटारे ,सहित अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने सरकार की नाकामियों की फेहरिस्त गिनाई है। पटवारी का आरोप है कि मुख्यमंत्री उपलब्धियां गिना रहे हैं और प्रदेश चार लाख 75 हजार करोड़ रुपये के कर्ज में डूबा हुआ है। किसानों को खाद नहीं मिल रही, बच्चे चार-चार दिन लाइन में खड़े रहते हैं। वहीं राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार कह रहे हैं कि इंदौर, भोपाल का मास्टर प्लान नहीं आया । बिजली दरों एवं ओबीसी आरक्षण पर भी उन्होंने सवाल उठाये हैं। उनका आरोप है कि कागजों में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण है लेकिन जमीन पर शून्य है। मक्का, सोयाबीन और गेहूं के लिए किसानों को उचित मूल्य सरकार क्यों नहीं दे पा रही यह भी सवाल उन्होंने उठाया है।

-अरुण पटेल,लेखक,संपादक  
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