वहीं, स्कूल प्रबंधन के इस मनमानी और धोखेबाजी को लेकर पेरेंट्स में नाराजगी है। यही वजह है कि यह विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पेरेंट्स का कहना है कि प्रवेश के समय स्कूलों ने सीबीएसई से संबद्ध होने का दावा किया था। इसी आधार पर पूरे शिक्षा सत्र में बच्चों को सीबीएसई कोर्स की पढ़ाई कराई गई।
बता दें कि ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल और नारायण ई-टेक्नो स्कूल सहित कई स्कूलों में सीबीएसई पैटर्न की पढ़ाई करने के बाद छात्र-छात्राओं को सीजी बोर्ड एग्जाम दिलाने के लिए मजबूर किया गया है।
CBSE पैटर्न पर दे चुके हैं एग्जाम
दरअसल स्कूल प्रबंधन इन छात्र-छात्राओं का एनवल एग्जाम भी ले लिए हैं, जिसमें उन्हें सीबीएसई पैटर्न के सवाल पूछे गए, लेकिन राज्य शासन ने इस बार 5वीं और 8वीं के स्टूडेंट्स के लिए सीजी बोर्ड एग्जाम लेने का फैसला लिया है, जिसके कारण इन स्कूलों के 5वीं और 8वीं कक्षा के बच्चों को सीजी बोर्ड एग्जाम देने के लिए मजबूर किया गया।
सीबीएसई ने नहीं दी है मान्यता, इसलिए हुआ विवाद
सीबीएसई स्कूलों की मान्यता के लिए 12वीं तक कक्षाएं संचालित होना अनिवार्य है, लेकिन ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल मिशन अस्पताल रोड, व्यापार विहार ब्रांच और नारायण ई-टेक्नो स्कूल सहित कई स्कूल में केवल 8वीं कक्षा संचालित है।
इस कारण सीबीएसई ने इन स्कूलों को मान्यता नहीं दी है। इस स्थिति में स्कूल प्रबंधन राज्य शासन से मान्यता लेकर स्कूलों का संचालन कर रहे हैं, जहां नियमों को दरकिनार कर सीबीएसई पैटर्न की पढ़ाई कराई जा रही है।
पेरेंट्स के बवाल के बाद शिक्षा विभाग ने बनाई जांच कमेटी
छात्रों को सीजी बोर्ड एग्जाम दिलाने के लिए दबाव बनाने के बाद स्कूलों की गड़बड़ियां सामने आई, जिसके बाद से पेरेंट्स में गहरी नाराजगी है। अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित और परेशान परिजनों ने स्कूल और कलेक्ट्रेट का घेराव किया।
बात नहीं बनी तो उन्होंने केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू से मुलाकात कर शिकायत की। विवाद बढ़ते देख अब शिक्षा विभाग ने जांच कमेटी बनाई है। शिक्षा विभाग के संभागीय संयुक्त संचालक ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की है, जिसे सात दिन के भीतर रिपोर्ट देने के लिए कहा है।
टीम में सहायक संचालक जेके शास्त्री, पी. दासरथी और तखतपुर के बीईओ शामिल हैं।











