भारत में जातिगत आरक्षण, शिक्षा एवं स्वास्थ्य की व्यवस्थाए

भारत में जातिगत आरक्षण, शिक्षा एवं स्वास्थ्य की व्यवस्थाए
हम यदि जातिगत आरक्षण और विश्लेषण पर जाएंगे तो देश कभी आगे नहीं आ सकता है क्योंकि जातिगत होने पर क्षेत्रीय आबादी समूह ज्यादा बढ़ेगा और हमेशा लोकतंत्र में अडंगा खड़ा रहेगा। जातिवाद बढ़ेगा तो हम हमेशा बटे रहेंगे। लोकतंत्र में देश की नागरिकता और सभी नागरिकों के अधिकारों में सब एक है पर राजनीतिक पार्टीया सत्ता पाने के लिए जातिगत विश्लेषण को आरक्षण के माध्यम से वोट पाने के आकलन में ज्यादा निर्भर रहते हैं। वे जातिगत तौर पर अपने उम्मीदवार खड़े करते हैं। सत्ता में जाति के बजाय व्यक्ति की क्षमता कार्यशैली गुणवत्ता के आधार पर उम्मीदवारी होने चाहिए।
शिक्षा और स्वास्थ्य प्राथमिकता नहीं
जिस देश में शिक्षा और स्वास्थ्य की प्राथमिकता ना हो वह देश कभी भी विकसित देश की श्रेणी में नहीं आ सकता। क्या कारण है कि भारत में आज आजादी के बाद इतने वर्षों में भी खासकर ग्रामीण क्षेत्र में और अनेक जगह शहरी क्षेत्र में भी सरकारी स्कूलों में सबसे निम्न स्तर की शिक्षा और छात्रों को सुविधा कहीं-कहीं तो नगण्य हैं। सरकार स्वास्थ्य सुविधाएं भी देने में अक्षम है इसका सबसे बड़ा कारण है अपने कर्मचारियों पर कडा रूख नहीं रखेना। सरकार कई बार अपने कर्मचारियों और अधिकारियों की लापरवाही गलती भ्रष्टाचारी गलत आचरण मालूम होने पर भी उन पर सीधे से कार्रवाई कर उन्हें सजा नहीं देती है बल्कि जांच बिठाने का निर्णय लेते है।
अशोक मेहता, इंदौर (लेखक पत्रकार पर्यावरणविद्)
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