पूरा मंत्रिमंडल मैनपाट में, यहीं से होंगे फैसले
इस तीन दिवसीय शिविर के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित पूरे मंत्रिमंडल, सांसदों और विधायकों की मौजूदगी मैनपाट में ही रहेगी। यानी राज्य सरकार के महत्वपूर्ण फैसले भी यहीं से लिए जाएंगे। मौसम विभाग द्वारा भारी बारिश का अलर्ट जारी किए जाने के बावजूद, संगठन की कमान संभाल रहे अजय जामवाल, पवन साय जैसे नेता एक दिन पहले ही शिविर स्थल पर पहुंच गए थे और तैयारियों की समीक्षा की।
सात महीने की देरी से हो रहा शिविर
आमतौर पर भाजपा निर्वाचन के तुरंत बाद प्रशिक्षण शिविर आयोजित करती है, लेकिन इस बार विधानसभा, लोकसभा और निकाय चुनावों की व्यस्तता के कारण इसमें लगभग सात महीने की देरी हुई। अब इसे राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने वाला शिविर माना जा रहा है।
सियासत मैनपाट से होगी संचालित
तीन दिन तक प्रदेश की पूरी राजनीति का केंद्र मैनपाट रहने वाला है। यह शिविर भाजपा के लिए संगठन की धार तेज करने, विधायकों-सांसदों के बीच संवाद बढ़ाने, और सरकार-संगठन की साझा प्राथमिकताओं को स्पष्ट करने का बड़ा मंच है।
चिंतन और रणनीति से भरा यह शिविर आने वाले पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों के साथ 2029 की तैयारी का बिगुल भी माना जा रहा है।











