भोपाल । नगर निगम परिषद की छठवीं बैठक गुरुवार सुबह 11.30 बजे शुरु हुई। करीब छह घंटे तक चली इस बैठक में कांग्रेस पार्षद विभिन्न मुद्दों को लेकर हंगामा करते रहे। इस दौरान जनहित से जुड़े कार्यों को लेकर ढाई घंटे से कुछ कम समय ही चर्चा हुई। निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार व अधिकारियों के तानाशही रवैसे से वार्ड क्रमांक 12 के भाजपा पार्षद देवेंद्र भार्गव भावुक होकर सदन छोड़कर चले गए। हालांकि इस दौरान परिषद के अन्य सदस्यों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं रुके। इसके साथ ही बैठक शुरु होने के साथ ही शहर सरकार का विरोध कर रही कांग्रेस को बैठे-बैठाए एक और मुद्दा मिल गया। कांग्रेस पार्षद भी देवेंद्र भार्गव की बातों का समर्थन करते हुए महापौर से इस्तीफे की मांग करने लगे। जिसके बाद 10 मिनट के लिए फिर परिषद स्थगित कर दी गई।
पीपीपी मोड पर विकसित होगा पार्क, स्वामी प्रभुपाद के नाम पर होगा मार्ग
परिषद बैठक में तीन प्रस्ताव रखे गए थे, जिन्हें बहुमत के आधार पर पारित कर दिया गया। इसमें अयोध्या नगर स्थित सरयू सरोवर पार्क को पब्लिक प्राइवेट पाटर्नशिप (पीपीपी) मोड पर विकसित किए जाने, आनंद नगर तिराहे से पटेल नगर रायसेन रोड, इस्कान मंदिर तक के मार्ग का नाम 'स्वामी प्रभुपाद मार्ग' किए जाने, पटेल नगर बस स्टाप का नाम 'इस्कान मंदिर' किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इसके साथ सार्वजनिक स्थलों और खुली भूमि पर होने वाले कार्यक्रमों में 25 हजार वर्गफीट जमीन में एक हजार रुपये प्रतिदिन ठोस अपशिष्ठ प्रभार, इससे अधिक पर 2500 रुपये प्रतिदिन व एक एकड़ से अधिक क्षेत्रफल पर पांच हजार रुपये वसूल किए जाने का प्रस्ताव पारित हुआ।
पार्षद देवेंद्र भार्गव ने बयां किया दर्द, बनाई गई जांच कमेटी
वार्ड - 12 के पार्षद देवेंद्र भार्गव ने अपनी बात कहने के लिए अध्यक्ष से समय मांगा। इस पर अध्यक्ष ने कहा कि वे प्रश्नकाल शुरु कर रहे हैं, इसके बाद चर्चा करते हैं। लेकिन भार्गव अड़ गए और बोलना शुरु कर दिया। उन्होंने पार्षदों की पीड़ा बयां करते हुए कहा कि भोपाल नगर निगम का पार्षद होने पर शर्म आती है। समझ में नही आता कि नगर निगम को महापौर चला रही हैं, एमआइसी चला रही है या अधिकारी चला रहे हैं। यांत्रिकी विभाग में हो रहे घोटाले और निगम की माली हालत खराब होने तथा एनजीटी द्वारा एक करोड़ के जुर्माना लगाए जाने के संबंध में बात रखी और सदन छोड़कर चले गए। बाद में अध्यक्ष ने इस मामले में तीन सदस्यीय जांच कमेटी बना दी है।
प्रश्नकाल में एक भी सवाल के नहीं पूरे हुए जवाब
बैठक में पार्षदों द्वारा पूछे गए 12 प्रश्नों के जवाब देना था, इसके लिए एक घंटे का समय निर्धारित था। इसमें पहले प्रश्न में वार्ड 35 की पार्षद शिरीन ने सभी वार्डों में कराए गए कार्यों का विवरण मांगा था। एमआइसी सदस्य अशोक वाणी ने उत्तर पढ़ना शुरु किया, जिसमें 45 मिनट का समय लग गया। फिर भी जबाव पूरा नहीं होता देख शिरीन ने लिखित में जबाव देने की बात मान ली। इसके बाद शबिस्ता जकी ने प्रश्न पूछा, लेकिन जबाव पूरा होने से पहले ही समय समाप्त हो गया। जिससे बचे हुए पार्षदों के जवाब नहीं आ पाए। हालांकि अब इन प्रश्नों के जवाब लिखित में भेजे जाएंगे।
कांग्रेस ने की महापौर के इस्तीफे की मांग
देवेंद्र भार्गव के आरोपों का समर्थन करते हुए नेता प्रतिपक्ष शाबिस्ता जकी, पार्षद योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान, मो. सरवर, प्रवीण चौहान, देवांशु कंसाना समेत अन्य पार्षदों ने अध्यक्ष की कुर्सी का घेराव कर दिया। साथ ही महापौर से इस्तीफा मांगा। पार्षदों ने अध्यक्ष से कहा कि आप न्याय की कुर्सी पर बैठे हैं। आपको न्याय करना होगा। पार्षदों ने सदन स्थगित करने की मांग कर दी। इस दौरान एमआईसी मेंबर मनोज राठौर, रविंद्र यति, जितेंद्र शुक्ला, जगदीश यादव समेत पार्षद भी आसंदी के पास आ गए और उन्होंने विपक्ष पर सदन नहीं चलने का आरोप लगाया। इसके चलते कांग्रेस पार्षद आसंदी के सामने ही धरने पर बैठ गए। वे पार्षद भार्गव द्वारा उठाए भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जांच कराने की मांग करने लगे।











