कमल मुनि ने कहा कि सिद्धांतहीनता अवसरवादीता से बड़ा और कोई अधर्म और पाप नहीं है जो सिद्धांतों के साथ स्वार्थ के लिए खिलवाड़ करता है। अपना और पराया अनुकूलता या प्रतिकूलता हो सिद्धांतों से समझौता नहीं करेंगे। अनुकूलता होगी तो समर्थन करेंगे प्रतिकूलता तो विरोध करेंगे यह सिद्धांत के साथ अन्याय है। किसी भी जाति पंथ धर्म संप्रदाय के साथ अन्याय होगा, उसके विरुद्ध मोर्चा खोलना उनकी रक्षा करना प्रत्येक धार्मिक का प्रथम कर्तव्य है। जैन संतों ने राजनीतिक दलों को भी सुझाव देते कहा कि सत्ता में हो या विपक्ष में सिद्धांतों की रक्षा के लिए दलगत भावना से ऊपर उठकर सहयोग करना नैतिक जिम्मेदारी है।
शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुरजीत चड्डा पिंटू जोशी, अशोक मंडलिक, अनुरोध जैन, जैनेश झांझेरी आनंद कासलीवाल घनश्याम जोशी साधना भंडारी, पवन जैन, नकुल पाटोदी, विपिन गंगवाल, प्रदीप बड़जात्या सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने मुनि हत्या और मनन का धर्म परिवर्तन की कठोर शब्दों में निंदा की। प्रकाश भटेवरा ने संचालन किया दिवाकर मंच के राष्ट्रीय संरक्षक अशोक मेहता ने आभार व्यक्त किया।











