भूपेश बघेल ने कहा, “आज बस्तर में नक्सलियों के बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण से यह स्पष्ट है कि यह राष्ट्रीय लड़ाई अपने अंत की ओर बढ़ रही है। सरकार और सुरक्षा बलों को बधाई।”
पूर्व मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि 2018 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद पहली बार नक्सल उन्मूलन नीति बनाई गई, कैंप खुले, सड़कें बनीं और शिक्षा संस्थान फिर से शुरू हुए। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सहयोग से इस चुनौती को राष्ट्रीय स्तर पर लिया गया।
बघेल ने कहा कि पूर्व की भाजपा सरकार (2003-2018) “माओवाद के खिलाफ अनिच्छुक” थी, जैसा कि सुरक्षा सलाहकार केपीएस गिल ने भी कहा था।
गौरतलब है कि शुक्रवार को जगदलपुर में 208 नक्सलियों ने हथियार डाल दिए, जिनमें 110 महिलाएं और 98 पुरुष शामिल हैं। आत्मसमर्पण करने वाले शीर्ष माओवादी नेताओं में रूपेश उर्फ सतीश, भास्कर उर्फ राजमन मंडावी, रनिता, राजू सलाम और धन्नू वेट्टी उर्फ संटू शामिल हैं। इन नक्सलियों ने 153 हथियार, जिनमें 19 एके-47 राइफलें और 17 एसएलआर शामिल हैं, पुलिस को सौंपे।











