भोपाल। रक्षाबंधन के दूसरे दिन शहर में मनाया जाने वाला भुजरिया पर्व शुक्रवार को उत्साह के साथ मना। मंगलवारा से पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच किन्नरों ने अपना परंपरागत भुजरिया चल समारोह निकाला। इसमें श्रृंगार कर बड़ी संख्या में किन्नर शामिल हुईं। सिर पर भुजरिया लेकर चलती किन्नरों को देखने लोगों की भीड़ जमा हो गई। फिल्मी गानों पर किन्नरों ने नृत्य किया। मुस्कान, महक, पल्लवी, पूनम आदि किन्नरों ने खूब नृत्य किया।
मंगलवारा व बुधवारा से निकले चल समारोह
मंगलवारा व बुधवारा से किन्नरों के चल समारोह अलग-अलग निकले। पीर गेट पर दोनों जुलूस एक साथ होने थे, लेकिन पुलिस ने जुलूस को रुकने नहीं दिया। इस पर किन्नरों व पुलिस जवानों के बीच बहस भी हुई। इसके बाद विभिन्न मार्गों से होते हुए बुधवारा व मंगलवारा के किन्नरों का ये जुलूस यहां से गुफा मंदिर पहुंचा, जहां पर भुजरियों का विसर्जन कुंडों में भुजरियों का विसर्जित किया गया।
10 किलो सोने के आभूषण पहनकर पहुंची किन्नरों की गुरु सुरैया
जुलूस में सबसे का आकर्षक का केंद्र रहीं किन्नरों की गुरु सुरैया। वे 10 कलो वजनी सोने के आभूषण पहनकर आईं। गले का बड़ा सोने से बना हार, हाथों, कानों सहित अन्य सोने के आभूषण पहने हुई थीं। यहां तक कि उनके मोबाइल पर सोने की परत चढ़ी हुई थी। ऊपर से नीचे तक सोने से लदी सुरैया को देखने लोगों की भीड़ जमा हो गई। कुर्सी पर बैठाकर किन्नरों से उनका स्वागत किया। वहीं मप्र के सामाजिक न्याय एवं दिव्यांग कल्याण विभाग के सचिव की निजी सहायक के तौर पर नियुक्ति पाने वाली पहली किन्नर संजना भी जुलूस में शामिल हुईं।
नवाबी शासन काल से किन्नर हर वर्ष निकालती हैं भुजरियां जुलूस
मंगलवारा व बुधवारा की किन्नरों की ओर से रक्षाबंधन के दूसरे दिन भुजरिया जुलूस निकालने की परंपरा नवाबी शासन काल से शुरू हई थी, जो अब तक बनी हुर्ठ है। इतिहासकारों के अनुसार शहर में वर्षा नहीं होने से अकाल पड़ था। ऐसे में किन्नरों के जुलूस निकलने से अधिक वर्षा हुई, तब से यह भुजरिया जुलूस निकाला जाने लगा। किन्नरों के भुजरिया जुलूस में फिल्मों का असर भी दिखता है। फिल्मी अंदाज में किन्नर सज-धज कर जुलूस में शामिल होती हैं। प्रदेश व देश की सुख-समृद्धि के लिए किन्नर भगवान से प्रार्थना करती हैं।











