1 जनवरी 2026 से 8 फरवरी 2026 तक भोपाल नगर निगम के पास अलग-अलग कैटेगरी में करीब 8 हजार शिकायतें पहुंची हैं। इसमें से 42% शिकायतों का अब तक कोई हल नहीं निकल पाया है, जो प्रदेश में सबसे खराब प्रदर्शनों में से एक है। बीते साल इसी दौरान करीब 5500 शिकायतें थीं, जिससे स्वच्छ सर्वे में भोपाल को फायदा मिला था।
स्वच्छता के बड़े-बड़े दावों के बीच सफाई को लेकर भी भोपाल की स्थिति चिंताजनक है। सफाई के मामले में जबलपुर के बाद सबसे ज्यादा 1948 शिकायतें भोपाल निगम की मिली हैं। इसके अलावा अतिक्रमण और बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों ने भी जनता की मुसीबत बढ़ा दी है, जिसकी शिकायतें दर्ज कराने में भोपाल प्रदेश में नंबर वन पर बना हुआ है।
आवारा कुत्तों का आतंक इस कदर है कि प्रदेश के बड़े शहरों के मुकाबले भोपाल में इसकी सबसे ज्यादा 531 शिकायतें हुई हैं। जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भी लोगों को सबसे ज्यादा चक्कर काटने पड़ रहे हैं। ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर की तुलना में भोपाल में इसको लेकर सबसे अधिक असंतोष है।
शिकायतों के मुख्य कारण
सफाई और सीवेज की बढ़ती शिकायतें स्थानीय स्तर पर काम की कमी बताती हैं। पुराने इलाकों में पाइपलाइन से चोक और लीकेज हो रहे हैं। पुरानी केबलिंग से स्ट्रीट लाइट खराब रहती हैं।
स्ट्रीट डॉग की सबसे ज्यादा शिकायतें (531) होने का कारण नसबंदी का प्रभावी न होना है। एबीसी सेंटर्स की क्षमता कम है और आवारा कुत्तों के फीडिंग स्पॉट को लेकर कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं है।











