जेल में नहीं रही भद्रा की पाबंदी, बंदी भाइयों को राखी बांधते वक्त बहनें हुईं भावुक

जेल में नहीं रही भद्रा की पाबंदी, बंदी भाइयों को राखी बांधते वक्त बहनें हुईं भावुक

भोपाल । रक्षाबंधन के अवसर पर बुधवार को केंद्रीय जेल में बंद पुरुष एवं महिला बंदियों की उनके स्वजन से खुली मुलाकात कराई गई। भद्रा के साए की पाबंदी को दरकिनार करते हुए बहनों ने बंदी भाइयों की कलाई पर राखी बांधी। इस दौरान माहौल काफी भावुक नजर आया। भाइयों ने भी यथायोग्य उपहार देकर बहन की रक्षा का संकल्प दोहराया। महिला बंदियों ने भी मुलाकात के लिए पहुंचे भाइयों को राखी बांधी। सुबह सात बजे से शुरू हुआ रक्षाबंधन पर्व मनाने का सिलसिला शाम चार बजे तक चला।

जेल परिसर में खुली मुलाकात के लिए लगाए गए थे टेंट

जेल उप अधीक्षक सरोज मिश्रा ने बताया कि त्योहार को देखते हुए जेल की कैंटीन में चार तरह की मिठाई बिक्री के लिए उपलब्ध थी। इसमें मावा बरफी, बालूशाही, मोतीचूर के लड्डू एवं बेसन के लड्डू शामिल थे। बाहर से लाई गई सामग्री को प्रतिबंधित रखा गया था। खुली मुलाकात के लिए टेंट लगाए गए थे। सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए थे।


तीन साल बाद जेल में खुलकर बंधी राखी

मिश्रा ने बताया कि जेल प्रबंधन कैलेंडर की तिथि के अनुसार त्योहार मनाने की अनुमति देता है। बुधवार को कुल 7,353 लोगों ने खुली मुलाकात कर अपने बंदी भाई-बहनों के साथ त्योहार मनाया। 194 महिला बंदियों में 127 महिलाओं से उनके भाई राखी बंधवाने पहुंचे थे। बता दें कि कोरोना काल में वर्ष 2020 एवं 2021 में जेल में रक्षाबंधन पर्व नहीं मनाया जा सका था। वर्ष 2022 में भी खुली मुलाकात की अनुमति नहीं मिली थी।
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