सावधान... बिना बुखार भी डेंगू ले रहा चपेट में, तेजी से कम होती है प्लेटलेट्स

सावधान... बिना बुखार भी डेंगू ले रहा चपेट में, तेजी से कम होती है प्लेटलेट्स
भोपाल। आमतौर पर डेंगू से ग्रस्त होने पर पहले हल्का या तेज बुखार आता है लेकिन पहली बार शहर में बिना बुखार वाले डेंगू के मरीज की पुष्टि हुई है। इसमें तेजी से प्लेटलेट्स कम होती है और जान का जोखिम बढ़ जाता है। इस तरह के मरीज की पुष्टि जेपी अस्पताल में हुई है।

500 से ऊपर पहुंचा आंकड़ा

असल में डेंगू का खतरा बढ़ता जा रहा है। शहर में अब तक 512 से अधिक डेंगू पाजीटिव मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। डेंगू के तीन तरह के लक्षणों वाले मरीज मिल रहे हैं। जिनमें सामान्य बुखार, तेज बुखार और बिना बुखार वाले मरीज शामिल हैं। इनमें बिना बुखार वाले मरीज पहली बार सामने आ रहे हैं।

थकान, हरारत की भी न करें अनदेखी

जेपी अस्पताल के एमडी मेडिसिन डा. योगेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि 35 वर्षीय एक युवक 18 अक्टूबर को दिखाने आया था। थकान और हरारत महसूस कर रहा था। बुखार नहीं था। फिर भी खून की जांच कराई तो पता चला कि वह डेंगू पाजीटिव है। प्लेटलेट्स काउंट बहुत कम थी। वहीं सत्येश कुमार के दो भतीजों को कुछ दिनों से बुखार आ रहा था, जांच कराने में डेंगू की पुष्टि हुई। लेकिन उनको डेंगू जैसे लक्षण बिल्कुल नहीं थे।

आम लक्षणों से अलग

आमतौर पर होने वाले डेंगू में मरीज तेज बुखार की शिकायत करता है। उसके शरीर में अधिक दर्द होता है, लेकिन मधुमेह के मरीजों, बूढ़े लोगों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में बुखार के बिना भी डेंगू हो सकता है। ऐसे मरीजों को बुखार तो नहीं होता, होता भी है तो हल्का बुखार होता है। लेकिन डेंगू के दूसरे लक्षण जरूर होते हैं। ये लक्षण भी काफी हल्के होते हैं।

हल्का संक्रमण, टेस्ट से ही चलता है पता

विशेषज्ञों की मानें तो इस तरह का डेंगू खतरनाक हो सकता है, क्योंकि मरीज को पता ही नहीं होता कि उसे डेंगू हो गया है। कई बार वो डाक्टर के पास भी नहीं जाते। इस तरह के डेंगू में बहुत हल्का संक्रमण होता है। मरीज को बुखार नहीं आता, शरीर में ज्यादा दर्द नहीं होता, चमड़ी पर ज्यादा चकत्ते भी नहीं होते। कई बार मरीज़ को लगता है कि उसे सामान्य वायरल हुआ। लेकिन टेस्ट कराने पर उनके शरीर में प्लेटलेट्स की कमी, सफेद और लाल रक्त कोशिकाओं की कमी होती है।

डाक्टर बोले, डेंगू के लक्षण अलग-अलग

डेंगू लगातार अपना रूप बदलता जा रहा है। एमडी मेडिसिन डा. योगेंद्र श्रीवास्तव बताते हैं कि अब से 15 दिन पहले जो केस आ रहे थे, उन्हें बुखार के अतिरिक्त कोई गंभीर लक्षण नहीं थे। अब आने वाले मरीजों को तेज बुखार है, ऐसे मरीजों को ब्लीडिंग हो रही है। हाथों में चिठ्ठे पड़ रहे हैं। इसके साथ प्लेटलेट्स अचानक से कम हो रही है। जिसके कारण मरीज गंभीर हो रहा है। हमारी भी डेंगू के बदलते ट्रेंड पर नजर है। इसकी जानकारी भी आने वाले दिनों में उच्चाधिकारियों को दी जाएगी।

प्राइवेट अस्पतालों में डेंगू के मरीजों की भरमार

प्राइवेट अस्पताल में डेंगू के संदिग्ध मरीज बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। निजी अस्पतालों में मरीजों का उपचार ब्लड सैंपल की रिपोर्ट और रैपिड डेंगू किट से जांच के बाद किया जा रहा है। आने वाले मरीज गंभीर भी हो रहे हैं। एक अस्पताल के संचालक ने बताया कि एलाइजा टेस्ट की रिपोर्ट में लंबा समय लगता है। इसके कारण किट से जांच कराकर हम मरीज का उपचार शुरू करा रहे हैं।

इनका कहना है

डेंगू अभी इतना गंभीर नहीं है, लेकिन डेंगू के मरीजों में अलग-अलग तरह के लक्षण आ रहे हैं। अस्पताल आने वाले मरीजों का काफी गंभीरता से परीक्षण करने की जरूरत है।

- डा. राकेश श्रीवास्तव, सिविल सर्जन, जेपी अस्पताल, भोपाल
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