राजधानी में साइबर सेल के पास ऐसे व्यक्ति पहुंचे हैं, जो सतर्कता के चलते ठगी से बच गए। उनकी शिकायत के बाद ठगों के नई तरीके से जाल बिछाने की जानकारी सामने आई है। देश के करोड़ों बीमा पालिसीधारकों का डेटा साइबर ठगों के हाथ लग गया है। इसकी मदद से वे बीमाधारकों को कंपनी अधिकारी बनकर फोन लगा रहे हैं। फर्जी अधिकारी पालिसीधारक को उनकी पालिसी का क्रमांक, पालिसी जारी होने की तिथि और किस्त राशि की पूरी जानकारी देकर विश्वास में ले लेते हैं।
आपकी किस्त से एजेंट की कमाई
फर्जी बीमा कंपनी अधिकारी बने ठग पालिसीधारक से पूछते हैं कि आपने जिस एजेंट के माध्यम से पालिसी ली थी क्या वह किस्त जमा करने में आपकी मदद करता है? अधिकतर लोग खुद किस्त जमा करने की बात करते हैं, तब उन्हें बताया जाता है कि आपकी प्रत्येक किस्त की राशि से एजेंट को कमीशन जा रहा है। इस कमीशन को एजेंट के बजाय पालिसी में ही जोड़ने का दावा करते हुए इस स्कीम को लागू करने के नाम पर 20 से 50 हजार रुपये तक जमा करने को कहा जाता है।
बताई लाखों की कमाई
भोपाल के दीप चतुर्वेदी को ठग ने कंपनी अधिकारी बनकर फोन किया और उनकी मैक्स लाइफ पालिसी की पूरी जानकारी देकर विश्वास में ले लिया। ठग ने गणना करके यह भी बता दिया कि पिछले 15 सालों में आपके द्वारा किस्त जमा करने से एजेंट को दो लाख रुपये से ज्यादा की कमाई हो चुकी है। इस कमीशन की राशि को आपकी पालिसी में जोड़ने पर पांच लाख रुपये बढ़ जाएंगे। इसके लिए 20 हजार फीस मांगी गई।
किंतु दीप चतुर्वेदी ने भुगतान के पहले कंपनी से संपर्क कर लिया, इसलिए वे ठगी से बच गए। ऐसा ही फोन भोपाल निवासी रवि पटेल के पास भी पहुंचा। हालांकि रुपये जमा करने के ठीक पहले वे ठगों की चाल भांपकर बच गए। मगर अधिकतर लोग दीप और रवि की तरह सतर्क नहीं होते, जिससे वे ठगों के इस नए झांसे में आ जा रहे हैं।











