डेटा से पता चलता है कि इसने FMCG सेक्टर की दिग्गज कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर और हेल्थकेयर की बड़ी कंपनी सन फार्मास्यूटिकल्स को पीछे छोड़ दिया है। स्टॉक एक्सचेंज के डेटा के इसके आगे अब रिलायंस इंडस्ट्रीज (₹16.77 लाख करोड़), HDFC बैंक (₹11.25 लाख करोड़), भारती एयरटेल, ICICI बैंक, SBI, TCS, बजाज फाइनेंस और LT रह गईं हैं।
क्या होगा आगे?
1,785 रुपये प्रति शेयर के IPO प्राइस पर NSE की वैल्यूएशन 4.42 लाख करोड़ रुपये थी। इसकी तुलना में, प्रतिद्वंद्वी BSE का मार्केट कैप 1.33 लाख करोड़ रुपये है। कंपनी की लिस्टिंग फीकी रही लेकिन बाजार के कुछ जानकारों का कहना है कि शुरुआती दिनों में NSE के शेयर की कीमत पर डिमांड-सप्लाई का काफी असर पड़ सकता है।उनका कहना है कि ज्यादातर बड़े निवेशकों पर एग्जिट की पाबंदियों के कारण बाजार में शेयरों की तुरंत सप्लाई सीमित हो सकती है, जिससे बाद में कीमतों को सहारा मिल सकता है। SEBI के नियमों के तहत, नॉन-प्रमोटर शेयरधारकों के पास मौजूद प्री-इश्यू शेयरों को IPO अलॉटमेंट की तारीख से छह महीने के लिए लॉक-इन में रखा जाता है।
