ईडी ने आरकॉम के खिलाफ अपनी चार्जशीट में कहा है कि कंपनी को अपराध से हुई कमाई का हिसाब 40,186 करोड़ रुपये लगाया गया है। यह बैंकों और वित्तीय संस्थानों के कंसोर्टियम को कंपनियों द्वारा नहीं चुकाई गई बकाया राशि है। साथ ही उन पर फंड जुटाने, उसका इस्तेमाल करने, छिपाने और दिखाने में भी अहम भूमिका निभान का आरोप लगाया गया है।। इसमें FCCB से मिली 1 बिलियन डॉलर की राशि के अंतिम इस्तेमाल का गलत सर्टिफिकेशन भी शामिल है।
अटैच संपत्ति जब्त करने की मांग
टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक ED ने इस मामले में पहले अटैच की गई 8,078 करोड़ रुपये की संपत्ति को जब्त करने की मांग की। यह संपत्ति रिलायंस कम्युनिकेशंस और उसके प्रमोटरों और डायरेक्टरों की है। इनमें अनिल अंबानी की संपत्ति भी शामिल है।रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ चार्जशीट में कहा गया है कि जांच से पता चला कि एनएचएआई द्वारा दिए गए चार टोल-रोड प्रोजेक्ट्स से पब्लिक फंड को दूसरी जगह लगाने की एक सुनियोजित योजना थी। इनमें त्रिची-करू, त्रिची-डिंडीगुल, सलेम-उलुंदुरपेट और जयपुर-रींगस प्रोजेक्ट शामिल हैं। इन प्रोजेक्ट्स को NHAI अनुदान और बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों से मिले लोन के जरिए फाइनेंस किया गया था। सितंबर-अक्टूबर 2010 के दौरान लगभग 187 करोड़ रुपये फर्जी सब-कॉन्ट्रैक्टिंग काम के नाम पर निकाल लिए गए।
