अक्षय तृतीया (आखा तीज) वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला एक अत्यंत पवित्र हिंदू त्यौहार है। 'अक्षय' का अर्थ है जो कभी समाप्त न हो। मान्यता है कि इस दिन किए गए दान, तप और पूजा का फल कभी खत्म नहीं होता। यह अबूझ मुहूर्त है, यानी विवाह, नए काम या सोने की खरीदारी के लिए पंचांग देखने की जरूरत नहीं होती। अक्षय तृतीया का पर्व हर साल वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश सहित पूरे उत्तर भारत में मनाया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे आखातीज या अक्खा तीज कहते हैं।
अक्षय तृतीया 2026 की महत्वपूर्ण जानकारी:
तिथि: 19 अप्रैल 2026.
तृतीया प्रारंभ: 19 अप्रैल 2026 सुबह 10:50 बजे I
महत्व: यह दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और परशुराम जी की पूजा के लिए समर्पित है।
अक्षय तृतीया का महत्व और मान्यताएं:
अबूझ मुहूर्त: इस दिन कोई भी नया कार्य, जैसे कि नया व्यवसाय, गृह प्रवेश, या विवाह बिना मुहूर्त के किया जा सकता है।
धन-समृद्धि: इस दिन सोना, चांदी या अन्य कीमती वस्तुएं खरीदना बहुत शुभ माना जाता है, जिससे घर में बरकत और सुख-समृद्धि आती है।
दान-पुण्य: इस दिन किया गया दान अक्षय फल देता है। अन्न, वस्त्र, जल, या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना बहुत पुण्यदायी माना जाता है।
पौराणिक मान्यता: माना जाता है कि इसी दिन सतयुग की शुरुआत हुई थी और भगवान विष्णु के नर-नारायण, हयग्रीव और परशुराम अवतार हुए थे।
विशेष खरीदारी: सोने-चांदी के अलावा, इस दिन नया नमक, साबुत धनिया या तांबे के बर्तन खरीदना भी घर में सकारात्मकता लाता है।
पूजा विधि:
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र (पीले या लाल) धारण करें।
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर को स्थापित करें।
कलश की स्थापना करें और रोली, चंदन, फूल, और तुलसी दल से पूजा करें।
लक्ष्मी जी को कमल गट्टे और गोमती चक्र अर्पित करें।
भोग में पीली मिठाई, फल, और धनिया का उपयोग करें।
लक्ष्मी जी और विष्णु जी के मंत्रों का जाप करें।
अक्षय तृतीया के दिन की गई पूजा और उपाय से घर में स्थायी सुख और शांति आती है।
आओ जानते हैं इस संबंध में पौराणिक तथ्य।
1. इस दिन भगवान नर-नारायण सहित परशुराम और हयग्रीव का अवतार हुआ था।
2. इसी दिन ब्रह्माजी के पुत्र अक्षय कुमार का जन्म भी हुआ था। कुबेर को खजाना मिला था।
3. इसी दिन बद्रीनारायण के कपाट भी खुलते हैं। जगन्नाथ भगवान के सभी रथों को बनाना प्रारम्भ किया जाता है।
4. इसी दिन मां गंगा का अवतरण भी हुआ था।
5. इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर के पूछने पर यह बताया था कि आज के दिन जो भी रचनात्मक या सांसारिक कार्य करोगे, उसका पुण्य मिलेगा।
6. अक्षय तृतीया के दिन ही वृंदावन के बांके बिहारी जी के मंदिर में श्री विग्रह के चरणों के दर्शन होते हैं।
7. इसी दिन सुदामा भगवान कृष्ण से मिलने पहुंचे थे। प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ ऋषभदेवजी भगवान के 13 महीने का कठीन उपवास का पारणा इक्षु (गन्ने) के रस से किया था।
8. इसी दिन सतयुग और त्रैतायुग का प्रारंभ हुआ था और द्वापर युग का समापन भी इसी दिन हुआ।
9. अक्षय तृतीया के दिन से ही वेद व्यास और भगवान गणेश ने महाभारत ग्रंथ लिखना शुरू किया था। आदि शंकराचार्य ने कनकधारा स्तोत्र की रचना की थी।
10. इसी दिन महाभारत की लड़ाई खत्म हुई थी।











