श्री रमेन डेका माननीय राज्यपाल छत्तीसगढ़ का उदबोधन

श्री रमेन डेका माननीय राज्यपाल छत्तीसगढ़ का उदबोधन

रायपुर, 26 जनवरी 2026 / प्रिय भाईयों, बहनों और प्यारे बच्चों... 77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर आप सभी को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं...

यह पवित्र अवसर हमें राष्ट्र की एकता और अखण्डता को सहेजते हुए देश के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने की प्रेरणा देता है। गणतंत्र दिवस भारतीय लोकतंत्र की महान परंपरा तथा हमारे संवैधानिक मूल्यों की समृद्ध विरासत का प्रतीक है। हम इस अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, नेता जी सुभाष चन्द्र बोस, सरदार भगत सिंह, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर से लेकर शहीद वीर नारायण सिंह, वीर गुंडाधुर समेत उन सभी नायकों का स्मरण करते हैं, जिनके देश प्रेम और त्याग से हमें हमारा गणतंत्र प्राप्त हुआ। आज के ही दिन हमें एक ऐसा संविधान प्राप्त हुआ, जो देश के सभी नागरिकों को स्वतंत्रता और समानता का अधिकार प्रदान करता है। हम सबका सौभाग्य है कि हम विश्व के सबसे बड़े और सबसे सुंदर गणतंत्र में निवास करते हैं। इस गणतंत्र का स्वप्न हमारे पुरखों ने देखा। बाबा गुरु घासीदास जी ने मनखे-मनखे एक समान का संदेश दिया। संविधान में समानता का अधिकार इस भावना को अभिव्यक्त करता है। शहीद वीरनारायण सिंह ने लोगों की भूख की पीड़ा देखी थी और इसे मिटाने के लिए अंग्रेजों से संघर्ष किया। हम एक ऐसे लोककल्याणकारी राज्य में रह रहे हैं, जहां सामाजिक-आर्थिक न्याय के साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण जैसी जरूरतों को पूरा किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ इन्हें लागू करने में मॉडल राज्य है। मुझे खुशी है कि छत्तीसगढ़ उन राज्यों में अग्रणी है, जहां सबसे पहले खाद्य सुरक्षा दी गई। हमारे लिए संविधान पवित्र दस्तावेज है। 1975 में इमरजेंसी लगाकर इसे तोड़ने-मरोड़ने की कोशिश हुई लेकिन हमारे लोकतंत्र सेनानियों के अदम्य साहस से यह कोशिश सफल नहीं हुई। छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य है, जो अपने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के साथ ही अपने लोकतंत्र सेनानियों का भी पूरा सम्मान करता है और उन्हें सम्मान निधि प्रदान करता है। आज के दिन हम देश की सरहदों और आंतरिक सीमा में राष्ट्र की रक्षा के लिए जुटे जवानों के योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। हम उन सभी नागरिकों के प्रति भी सम्मान प्रकट कर रहे हैं जो अपनी कड़ी मेहनत से राष्ट्र निर्माण के कार्य में लगे हुए हैं। आप सभी की कोशिशों का ही परिणाम है कि भारत ने जापान को पीछे छोड़कर विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने का गौरव हासिल कर लिया है। वर्ष 2000 में अटल जी ने छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण किया। रजत जयंती वर्ष में हमने छत्तीसगढ़ को वर्ष 2047 तक विकसित राज्य बनाने का संकल्प लिया है और इसके लिए अंजोर विजन डाक्यूमेंट के रूप में रोडमैप भी तैयार किया है। मुझे विक्टर ह्यूगो (victor hugo) का कथन याद आता है कि दुनिया की कोई भी ताकत उस विचार को रोक नहीं सकती, जिसका समय आ गया है। भारत विकसित देशों की कतार में खड़ा होने के लिए तेजी से बढ़ रहा है और प्रधानमंत्री जी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप हम भी विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। देश के 19 प्रतिशत से अधिक आयरन का उत्पादन हम करते हैं। 20-20 प्रतिशत सीमेंट, एल्यूमीनियम और कोयले का उत्पादन हमारे प्रदेश में होता है और हम देश का पॉवर हब बनने की ओर अग्रसर हैं। देश के सबसे बड़े रेलवे पुल चिनाब में हमारे भिलाई स्टील प्लांट का फौलाद है। देश की नौसेना सरहदों को संभालने वाले आईएनएस विक्रांत में हमारा फौलाद है। मुंबई के बांद्रा-वर्ली सी लिंक ब्रिज में छत्तीसगढ़ में तैयार स्टील इस्तेमाल हुआ है। विकसित भारत मैन्युफैक्चरिंग की उछाल से बनेगा और कोर सेक्टर के मामले में सबसे अधिक संभावनाएं छत्तीसगढ़ में है। छत्तीसगढ़ देश के सबसे तेजी से उभरते हुए राज्यों में से एक है। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में प्रदेश में तेजी से अधोसंरचना का विस्तार हुआ है। विशाखापट्नम एवं रांची को जोड़ने वाली एक्सप्रेस वे तैयार हो रही है। PMGSY से कोने-कोने में ग्रामीण सड़कें बिछ गई हैं। वर्ष 2014 से अब तक रेलवे के जो प्रोजेक्ट्स बने हैं और जो पाइपलाइन में हैं उन्हें शामिल किया जाए तो रेलवे ट्रैक की लंबाई उतनी ही होती है जितना रेलवे के इतिहास से वर्ष 2014 तक बिछी थी। खरसिया-परमालकसा जैसे रेलवे ट्रैक के माध्यम से छत्तीसगढ़ के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों को जोड़ा जा रहा है। वन्दे भारत जैसी अत्याधुनिक और सुविधापूर्ण ट्रेन नागरिकों को मिली हैं। उड़ान योजना के तहत प्रदेश के एयरपोर्ट्स को अपग्रेड किया गया है और प्रदेश को देश के प्रमुख शहरों से बढ़िया कनेक्टिविटी मिली है। रायपुर एयरपोर्ट से कार्गो की शुरूआत भी हो चुकी है। हमारी नई औद्योगिक नीति ने प्रदेश में निवेश के लिए नई संभावनाएं पैदा की हैं। 7 लाख 83 हजार करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव राज्य को मिले हैं। इनसे बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। बरसों तक छत्तीसगढ़ ने माओवादी हिंसा की यातना झेली है। हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हमने सुनियोजित रणनीति के माध्यम से माओवाद के विरुद्ध लड़ाई छेड़ी। मैं प्रदेश के बहादुर जवानों के साहस की भरपूर प्रशंसा करता हूँ। आप लोगों ने रात-दिन जागकर कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी अपना मनोबल ऊंचा रखा है। हमारे जवानों ने जहर फैलाने वाले माओवाद के थिंकटैंक को न्यूट्रलाइज किया है। हमने माओवादियों से हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतंत्र में आस्था प्रकट करने की अपील की। बहुत से माओवादियों ने हिंसा को छोड़कर संविधान को अपनाया। हमने नक्सलियों के पुनर्वास की नई नीति तैयार की। दो सालो में ही 2500 से अधिक नक्सलियों ने संविधान में आस्था प्रकट की। बस्तर की धरती से हम इस साल के मार्च महीने तक माओवाद को पूरी तरह से समाप्त कर देंगे। बस्तर ने माओवाद का बड़ा नुकसान सहा है। अब बस्तर के जख्मों को तेजी से भरने का काम हमें करना है। इसके लिए हमने ठोस Roadmap तैयार किया है। नई औद्योगिक नीति में जनजातीय क्षेत्रों में निवेश पर सर्वाधिक अनुदान प्रावधान हैं। जनजातीय लोगों के लिए उद्यम आरंभ करने पर सस्ती जमीन और विशेष रियायतें हैं। एक हजार करोड़ के निवेश अथवा 1000 से अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार देने पर विशेष अनुदान की व्यवस्था भी है। नियद नेल्ला नार (Niyad Nella Naar) जैसी योजनाओं के माध्यम से नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन इलाकों में सतत विकास पर जोर रहा है ताकि स्थानीय वनोपज आदि संसाधनों के बेहतर दोहन से जनजातियों की आय बढ़े। वन धन केंद्रों के माध्यम से संग्राहकों को संग्रहण का उचित भुगतान हो रहा है। प्रधानमंत्री जी द्वारा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान एवं प्रधानमंत्री जनमन योजना आदि प्रमुख योजनाओं के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों में व्यापक विकास कार्य कराए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री जनमन योजना एवं आदि कर्मयोगी अभियान के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिए राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा छत्तीसगढ़ को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य के रूप में सम्मानित किया गया है। बस्तर में बंद पड़े अनेक स्कूल हमने पुनः आरंभ किये हैं। मुझे पूरा भरोसा है कि विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत का नेतृत्व इन्हीं स्कूलों में से निकले प्रतिभाशाली बच्चे करेंगे। माओवादी हिंसा के चलते प्रदेश के धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं भी ठप पड़ी थीं। अब इनका कायाकल्प (Rejuvenation) हो रहा है। सुकमा के चिंतागुफा स्वास्थ्य केंद्र को राष्ट्रीय स्तर पर गुणवत्ता सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ। अब यहां सीजेरियन डिलीवरी भी हो रही है। मोबाइल मेडिकल वैन दुर्गम जनजातीय क्षेत्रों में भी पहुंच रही हैं। अभी पिछले महीने ही 51 मोबाइल मेडिकल वैन को विशेष पिछड़ी जनजाति वाली बसाहटों के लिए भेजा गया है। MBBS की पढ़ाई हिंदी में शुरू होने से जनजातीय और ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को भी सुविधा हो रही है। दंतेवाड़ा के गीदम में मेडिकल कालेज शुरू होने से स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ मेडिकल एजुकेशन का विस्तार होगा। शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी प्राप्त करना ही नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण भी है। बच्चों के समग्र विकास में शिक्षा की अहम भूमिका को देखते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अपनाया गया है। इसके माध्यम से बच्चे भारत के गौरवशाली इतिहास और संस्कृति के साथ ही आधुनिक ज्ञान-विज्ञान भी सीख रहे हैं। Newton और Galileo की तरह ही आर्यभट्ट (Aryabhatta) और ब्रह्मगुप्त (Brahmagupta) जैसे हमारे खगोलविदों और गणितज्ञों ने आज से सैकड़ों बरस पहले ऐसे गणितीय सूत्रों को खोजा, जिससे यूनिवर्स की हमारी समझ मजबूत हुई, दुर्भाग्य से इन्हें सिलेबस में मामूली जगह दी गई। अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति में इन्हें शामिल किया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्थानीय भाषाओं में बच्चों को पढ़ाने पर फोकस किया गया है इसे ध्यान में रखकर प्रदेश में स्थानीय भाषाओं में शिक्षा दी जा रही है। इससे बच्चों का शिक्षा के प्रति फोकस बढ़ा है। दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में भी शिक्षकों की पर्याप्त व्यवस्था हो, इसके लिए Rationalization को अपनाया गया है। विद्या समीक्षा केंद्रों के माध्यम से 9 हजार स्कूलों में स्मार्ट क्लास बनाए जा रहे है। 

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