ग्वालियर। कतर में एक साल से ज्यादा समय से हिरासत में 8 पूर्व भारतीय नौसैनिकों को अदालत ने मौत की सजा सुनाई है। इसमें मध्य प्रदेश के भोपाल के रहने वाले पूर्णेंदु तिवारी भी शामिल हैं। पूर्णेंदु भारतीय नौसेना में कमांडर रह चुके हैं। पूर्णेंदु वर्तमान में कतर में नौसेना को प्रशिक्षण और अन्य सेवाएं देने वाली कंपनी के साथ काम कर रहे थे।
परिजनों को प्रधानमंत्री से उम्मीद
नौसेना के पूर्व अधिकारी पूर्णेंदु तिवारी को कतर में मौत की सजा दिए जाने का निर्णय उनके ग्वालियर में रहने वाले परिवार तक पहुंचते ही स्वजन बैचेन हो गए। पूर्णेंदु की बहन ग्वालियर के सिटी सेंटर क्षेत्र में रहतीं हैं। डा मीतू भार्गव ने नईदुनिया टीम से बातचीत के दौरान कहा कि- हम आशान्वित हैं। प्रधानमंत्री कुछ कर पाएंगे, ऐसी उम्मीद है। बहन मीतू लंबे समय से भाई की रिहाई के लिए संघर्ष कर रही हैं..
एक साल से संपर्क टूटा
पिछले साल अगस्त माह से कतर में भाई से संपर्क नहीं हो पा रहा था। नवंबर 2022 में उन्होंने अपने भाई को कतर से रिहा करवाने के लिए पीएम मोदी, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को ट्वीट किया था। इसके बाद विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने उनसे संपर्क किया था, लेकिन रिहाई नहीं हो सकी थी।
गुरुवार रात डा.मीतू भार्गव से जब नईदुनिया टीम ने संपर्क किया तो उन्होंने तमिलनाड़ में होने की बात कही। नईदुनिया टीम विंडसर हिल्स में उनके निवास पर पहुंची। यहां कोई नहीं था। डा.मीतू भार्गव पिछले साल से ही लगातार उनकी रिहाई को लेकर प्रयास कर रही थीं। विदेश मंत्रालय भी गई थीं। डा मीतू ने बताया कि हम पहले भोपाल स्थित अरेरा कालोनी में रहते थे और मैं ग्वालियर की विंडसर हिल्स कालोनी में निवासरत हूं। भाई कतर में ही रहता था पूर्णेंदु के साथ देश के साथ सभी सात पूर्व भारतीय नौसैनिक काम कर रहे थे।
भारत सरकार ने जताई हैरानगी
कतर की अदालत के फैसले से भारत सरकार हैरान है। भारत सरकार ने कहा कि कतर की अदालत के फैसला चौंकाने वाला है। हमें उनके फैसले से गहरा सदमा लगा है। भारत अदालत के फैसले के बाद कानूनी विकल्पों को तलाश रहा है। हालांकि, पूर्व आठ भारतीय नौसैनिकों पर क्या आरोप है यह भारत सरकार और कतर की सरकार ने आधिकारिक बयान नहीं दिया।











