बैठक में उठा अस्पताल के प्रदर्शन का मुद्दा
सोमवार को आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी इला तिवारी ने गोविंदपुरा अस्पताल में कम डिलीवरी और पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में कम बच्चों के भर्ती होने का मुद्दा उठाया। इस पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि अस्पताल में पर्याप्त स्टाफ और संसाधन उपलब्ध हैं, लेकिन अपेक्षित स्तर की सेवाएं नहीं दी जा रही हैं। इस पर कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए।
डिलीवरी और NRC दोनों में प्रदर्शन कमजोर
बैठक में बताया गया कि गोविंदपुरा सीएससी में अब तक केवल 44 डिलीवरी हुई हैं, जबकि यहां करीब 100 डिलीवरी हो जानी चाहिए थीं। वहीं जिले के पांच पोषण पुनर्वास केंद्रों (एनआरसी) में सबसे खराब स्थिति भी गोविंदपुरा अस्पताल की रही। 10 बेड होने के बावजूद यहां बेड ऑक्यूपेंसी केवल 4 प्रतिशत दर्ज की गई। पूरे वर्ष में सिर्फ 10 गंभीर कुपोषित बच्चों को भर्ती किया गया, जिनमें से केवल 50 प्रतिशत बच्चे पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौटे, जबकि बाकी 50 प्रतिशत बच्चों ने इलाज बीच में ही छोड़ दिया।
जेपी अस्पताल का प्रदर्शन बना उदाहरण
बैठक में बताया गया कि इसके विपरीत जेपी अस्पताल में एनआरसी की बेड ऑक्यूपेंसी 124 प्रतिशत और रिकवरी दर 96.2 प्रतिशत रही। इसी अंतर को देखते हुए जिला स्वास्थ्य समिति ने गोविंदपुरा अस्पताल के प्रदर्शन पर सवाल उठाए और अधीक्षक के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।
डेंगू-मलेरिया और टीबी पर भी दिए निर्देश
कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं जिले की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। उन्होंने अधिकारियों को क्षेत्र में जाकर योजनाओं की नियमित समीक्षा करने और कमजोर प्रदर्शन पर जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही डेंगू और मलेरिया के हॉटस्पॉट क्षेत्रों में लार्वा सर्वे एवं जागरूकता अभियान चलाने, टीबी मरीजों के लिए फूड बास्केट में सामाजिक सहयोग बढ़ाने तथा निर्माण स्थलों पर कार्यरत महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण के लिए स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग को संयुक्त रूप से काम करने के निर्देश भी दिए।











