भोपाल। मास्टर प्लान 2031 में शहरी क्षेत्र के साथ 32 पंचायताें को भी शामिल किया गया है, लेकिन इसके लिए ग्राम सभा से अनुमति नहीं ली गई। यह आरोप मास्टर प्लान की आनलाइन सुनवाई के दौरान भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने लगाया है। इस दौरान उन्होंने इसमें सुधार करने का सुझाव भी दिया। इसके साथ जयवर्धन सिंह, अजय गोयनका, नरेश ज्ञानचंदानी और जिला व्यापार एवं उद्याेग केंद्र समेत 105 आपत्तिकर्ताओं ने आपत्ति और सुझाव प्रस्तुत किया। बता दें कि मंगलवार को मास्टर प्लान में सुनवाई का आखिरी दिन था। अब तक मास्टर में 3005 आपत्ति व सुझाव शामिल किया गया है।
रामेश्वर शर्मा ने बताया कि संविधान के 73-74 वें संशोधन में ग्राम पंचायत को अपनी विकास योजना बनाने का अधिकार है। मुख्यमंत्री ने स्वयं इसमें सहमति दी है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र को मास्टर प्लान में सम्मिलित करने से पहले अधिकारियों को बताना था कि गावं की जमीन को योजना में शामिल करने से क्या लाभ होगा और इसका किस प्रकार उपयोग किया जाएगा। साथ ही ग्राम सभा में बहुमत के अाधार पर अनुमति लेनी थी। वहीं शहर के विभिन्न क्षेत्रों में वर्तमान व भविष्य के हिसाब से एफएआर बढ़ाने की जरुरत है, लेकिन इसे कम किया गया है। एक तरफ शहर के चारों ओर रिंग रोड बनाई जा रही है, सिक्सलेन व फोरलेन सड़कें बन रही हैं। लेकिन इसके आसपास विकास को लेकर मास्टर प्लान में कोई प्रविधान नहीं है।
मास्टर प्लान से भूमि विकास अधिनियम का उल्लंघन
क्रेडाई के अध्यक्ष नितिन अग्रवाल ने बताया कि भूमि विकास नियम 2012 में सड़क की चौड़ाई के हिसाब से एफएआर तय किया गया है। इसी आधार पर प्रदेश के अन्य शहरों को विकसित किया जा रहा है। लेकिन भोपाल में अधिकारियों ने इसे लागू नहीं करने दिया। वहीं अब एफएआर देने के लिए सड़क की चौड़ाई का ध्यान नहीं रखा गया। जो कि भूमि विकास नियम का उल्लंघन है। इधर नहर के दोनों ओर 15 मीटर सड़क का प्रविधान है, तो नाले और नदियों को इससे अलग क्यों रखा। जबकि इनके दोनों सड़क बनने से नाले व नदी पर अतिक्रमण के साथ गंदगी भी रुकेगी।
साबरमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर बड़े तालाब का विकास
कांग्रेस नेता नरेश ज्ञानचंदानी ने बताया कि नए मास्टर प्लान में बैरागढ़ से सीहोर रोड तक की जमीनों का उपयोग कृषि से हटाकर कैचमेंट में प्रस्तावित किया है, जो अनुचित है। बैरागढ़ की आबादी तीन गुना तक बढ़ चुकी है, उसके हिसाब से मास्टर प्लान में कोई योजना नहीं है।
ज्ञानचंदानी ने सुझाव दिया कि बड़े तालाब के लेक फ्रंट को साबरमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर विकसित किया जाए। इससे न सिर्फ तालाब संरक्षित होगा, बल्कि तालाब की सीमा में होने वाले अतिक्रमण और खेती के कारण तालाब में मिल रहे पेस्टिसाइड पर भी रोक लग सकेगी।
किसानों ने जलाई प्रस्तावित मास्टर प्लान की प्रतियां
बड़े तालाब के आसपास लगे ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों ने भी मास्टर प्लान में बड़ी संख्या में आपत्ति लगाई। किसान यूनियन के अध्यक्ष अनिल यादव ने बताया कि बड़े तालाब का कैचमेंट क्षेत्र 2800 हेक्टर है, जिसे बिना किसी मुआवजे एवं नोटिफिकेशन के 3872 हेक्टर कर दिया गया है। जबकि बीते 60-70 वर्षों से ग्रामीण यहां कृषि कार्य करते आ रहे हैं। अब यदि इसे ग्रीन बेल्ट में शामिल करते हैं, तो किसानों को अपने पुरखों की जमीन छोड़नी होगी और मुआवजा भी नहीं मिलेगा। इसको लेकर मंगलवार को बड़ी संख्या में किसानों ने टीएडंसीपी कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया और प्रस्तावित मास्टर प्लान की प्रतियां भी जलाई।











