एमपी के सबसे लंबे फ्लाईओवर में 3 बड़ी चुनौतियां:थर्ड लेग पर सिग्नल नहीं; कट पाइंट नहीं होने से 2Km फेरा

एमपी के सबसे लंबे फ्लाईओवर में 3 बड़ी चुनौतियां:थर्ड लेग पर सिग्नल नहीं; कट पाइंट नहीं होने से 2Km फेरा

भोपाल में एमपी के सबसे लंबे डॉ. भीमराव अंबेडकर फ्लाईओवर (गणेश मंदिर से गायत्री मंदिर तक) का लोकार्पण हो गया है। CM डॉ. मोहन यादव ने ब्रिज का उद्घाटन कर इसे जनता को समर्पित कर दिया। अब एमपी नगर की मेन सड़क का 60% ट्रैफिक ब्रिज के ऊपर से गुजर रहा है और जाम से बड़ी राहत मिली है। अब एकसाथ तीन ब्रिज सुभाषनगर, डॉ. अंबेडकर और वीर सावरकर जुड़ गए हैं। जिनकी कुल लंबाई 6 किमी है।

हालांकि, ब्रिज पर 3 ऐसी बड़ी चुनौतियां हैं, जो लोगों को भारी पड़ रही है। लोकार्पण के बाद दैनिक भास्कर ने जब ब्रिज का मुआयना किया तो ये चुनौतियां सामने आईं, पढ़िए रिपोर्ट...।

ब्रिज को लेकर ये चुनौतियां... 1- ब्रिज की थर्ड लेग पर सिग्नल नहीं ब्रिज की लंबाई पौने 3 किमी है, जो गणेश मंदिर से गायत्री मंदिर तक जाता है। एक लेन अरेरा पहाड़ी (शौर्य स्मारक चौराहा) तक जाता है। जब ये तीनों लेग एक-दूसरे से जुड़ती हैं तो यहां पर सिग्नल नहीं लगे हैं। ऐसे में तेज रफ्तार में टर्न लेने पर गाड़ियां एक-दूसरे से भिड़ सकती है। हालांकि, बीच में छोटी सी रोटरीनुमा जगह जरूर है।

2- गणेश मंदिर पर कट पाइंट नहीं फ्लाईओवर का एक सिरा गणेश मंदिर पर उतरता है। इसके आगे वीर सावरकर ब्रिज है। पहले सड़क के बीच में डिवाइडर नहीं बना था। इसलिए लोग राइट टर्न लेकर अरेरा कॉलोनी, 10 नंबर मार्केट, बिट्‌ठन मार्केट, कोलार रोड, शाहपुरा की ओर मुड़ जाते थे, पर अब बीचोंबीच डिवाइडर बना दिया गया है। ऐसे में इन जगहों पर जाने के लिए वीर सावरकर ब्रिज होते हुए आना पड़ रहा है। इससे करीब 2 किमी का अतिरिक्त फेरा लग रहा है। मंदिर के पास सिग्नल लगाकर ट्रैफिक को रोका जा सकता है। पहले दिन लोग रॉन्ग साइड में चले गए।

3- शौर्य स्मारक चौराहे पर टर्निंग में दिक्कतें ब्रिज की कुल 3 लेग है। इनमें पहली गणेश मंदिर, दूसरी गायत्री मंदिर और तीसरी भोपाल हाट के पास शौर्य स्मारक चौराहे पर है। तीसरी लेग पर गाड़ियों को उतरने और टर्निंग में दिक्कतें आ रही हैं। यहां बीच में रोटरी बनाए जाने की जरूरत है।

लागत को लेकर खड़े हुए सवाल

हालांकि, अब इसकी लागत को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। गायत्री मंदिर वाली आर्म के पास जहां सीएम ने फ्लाईओवर का लोकार्पण किया, वहीं आमने-सामने दो बोर्ड लगे हैं। एक पर लागत 126 और दूसरे पर 140 करोड़ रुपए लिखी है।

उधर, पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने लागत तकरीबन 154 करोड़ बताई है। अलग-अलग लागत बताने वाले बोर्ड लोकार्पण के बाद चर्चा में रहे। हालांकि, जानकारों का कहना है कि कुल लागत जीएसटी आदि को जोड़कर 154 करोड़ बताई गई है।

पहले दिन ही कम हुआ ट्रैफिक का दबाव

फ्लाईओवर के लोकार्पण के बाद भास्कर ने इसके बनने के बाद ट्रैफिक की स्थिति का जायजा लिया। गणेश मंदिर से डीबी सिटी तक शाम 5:30-6:30 बजे के सड़क पर प्रति घंटे 5000 पैसेंजर कार यूनिट (पीसीयू) का दबाव रहता है। गुरुवार को फ्लाईओवर पर ट्रैफिक शुरू होने के बाद गायत्री मंदिर से गणेश मंदिर की दूरी सामान्य गति से करीब 5 मिनट में पूरी हो गई। हालांकि, सड़क के रास्ते इतनी ही दूरी में 14 मिनट लगे।

मानसरोवर तिराहे पर 20 सेकंड, प्रगति चौराहा पर 60 सेकंड और बोर्ड ऑफिस चौराहा पर 80 सेकंड तक सिग्नल ग्रीन होने का इंतजार करना पड़ा।

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वल्लभ भवन चौराहे पर गफलत

डीबी सिटी रोटरी होते हुए वल्लभ भवन चौराहा पहुंचने पर ब्रेकर बना दिए हैं। मकसद डीबी सिटी रोटरी की ओर से आने वाले वाहनों की रफ्तार कम करना है। लेकिन ये ब्रेकर चढ़ाई पर लगाए गए हैं, जो किसी हादसे का सबब भी बन सकता है। यहां फ्लाईओवर से उतरने वाला ट्रैफिक और रोटरी होकर आने वाला ट्रैफिक ग्रीन सिग्नल पर एक साथ कोर्ट की ओर बढ़ रहा है। इससे लोड बढ़ रहा है।

फ्लाईओवर की सड़क पर क्रेक

डॉ. भीमराव आंबेडकर फ्लाईओवर की सड़क पर आरकेएमपी स्टेशन के सामने क्रेक नजर आ रहे हैं। सैकड़ों की संख्या में ये क्रेक आधे से एक फीट तक लंबे और पतले हैं। हालांकि, जानकार इसे श्रृंकेज क्रेक बता रहे हैं, जो कांक्रीट में हीट ऑफ हाइड्रेशन के कारण बनते हैं। इससे फ्लाईओवर को स्ट्रक्चरल नुकसान नहीं होगा।

खुली जीप में ब्रिज से गुजरे थे सीएम ब्रिज के लोकार्पण के बाद सीएम डॉ. यादव का काफिला मैदा मिल वाले आर्म से ब्रिज पर चढ़ा और डीबी मॉल के सामने से टर्न लेकर भोपाल हाट वाले आर्म पर उतरा। सीएम खुली जीप में सवार थे। मंत्री राकेश सिंह, विधायक रामेश्वर शर्मा और भगवानदास सबनानी भी खुली जीप में सवार थे।

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