भोपाल। शहर में जगह-जगह जमा हो रहा पानी, मच्छरों की नई नस्लें विकसित कर रहा है। जलभराव की वजह से डेंगू बेकाबू होता जा रहा है। शहर में बीते अक्टूबर माह में ही 270 से अधिक डेंगू के मरीजों की पुष्ठि हुई है, तो वहीं अब तक कुल 580 मरीज मिल चुके हैं। इसके पीछे नगर निगम के अधिकारियों की लापरवाही है। शहर की 27 लाख आबादी के लिए निगम के पास केवल 12 मशीनें हैं, इनमें भी दो बंद पड़ी हैं। नौ मशीनों को फायर ब्रिगेड की टीम संचालित करती है, जबकि तीन मशीनें उन जोन में एएचओ को दी गई हैं, जहां 74 बंगला, रचना नगर और चार इमली जैसे वीआईपी इलाके आते हैं। ऐसे में शहरवासियों को डेंगू से बचने का इंतजाम खुद को ही करना होगा।
बता दें कि नगर निगम डेंगू में फागिंग के लिए दो तरह की दवाएं इस्तेमाल करता है। पहली साइनोथियन और दूसरी टेमोफसस। साइनोथियन का इस्तेमाल खुले में फागिंग के लिए किया जाता है, जबकि टेमोफास डेंगू लार्वा नष्ट करने के लिए छिड़की जाती है। अधिकारियों ने हर महीने दोनों दवाओं की खपत 100-100 लीटर बताई है। यानी दोनों दवाओं पर निगम हर महीने 2.81 लाख रुपए खर्च करता है। निगम सूत्रों का कहना है कि फागिंग की कोई लागबुक मेंटेन नहीं होती। इसलिए ये तय कर पाना मुमकिन नहीं होता कि वाकई इतनी दवा फागिंग में इस्तेमाल हुई भी है या नहीं।
एक लाख गंबूजिया मछली भी नही रोक पाई डेंगू का डंक
डेंगू के मरीज दिनों-दिन बढते जा़ रहे हैं, लेकिन प्रसाशन अब तक बीमारी को रोक पाने में नाकाम रहा है। अब तक शहर में डेंगू से दो लोगों की मृत्यु हो चुकी है। लेकिन ना तो मलेरिया विभाग बीमारी की रोकथाम में सफल हो पाया और ना ही नगर निगम। रहवासियों की शिकायत के बावजूद प्रसाशन के द्वारा उन तक कोई मदद नहीं पहुंच पाई है। मलेरिया विभाग जलभराव वाले स्थनों व गढढों में एक लाख मछलियां डाल चुका है। फागिंग मशीन से छिड़काव किया है, फिर भी बीमारियों की रोकथाम में कोई सफलता नहीं मिल पा रही है।
27 लाख लोगों में 52 टीम कर रही है लार्वा सर्वे
शहर की 27 लाख जनसंख्या के लिए मलेरिया विभाग में पर्याप्त कर्मचारियों की कमी है, जिसके कारण अब तक लार्वा का सर्वे 50 प्रतिशत इलाकों में ही हो पाया है। शहर में डेंगू के लार्वा को खत्म करने के लिए मलेरिया विभाग की 44 टीमों के साथ आठ अन्य टीमों को लगाया गया है।
नियमानुसार नहीं की जा रही फागिंग
नियम कहता है कि फागिंग शाम ढलने और रात होने के बीच की जानी चाहिए, क्योंकि यही वक्त मच्छरों के मूवमेंट का होता है। इससे पहले और बाद में की गई फागिंग से कोई फायदा नहीं। निगम अमला उन इलाकों में दिन में भी फागिंग कर रहा है, जहां हाल ही में डेंगू-चिकनगुनिया का कोई केस मिला हो।
इनका कहना है
हमारे घरों के आसपास गड्ढों में पानी भरा है। इनमें दवा डालने के लिए नगर निगम के अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं। लेकिन न तो दवा डाली गई और न ही आसपास फागिंग कराई गई।
- अशोक यादव, खजूरी कला
पड़ोस में डेंगू के संदिग्ध मरीज मिल चुके हैं। लेकिन अब तक हमारे घर के आसपास न तो फागिंग कराई गई और न ही सर्वे के लिए कोई टीम कालोनी में आइ।
- सुरेश मिश्रा, अवधपुरी
जगह-जगह गडडों में पानी भरा हुआ है। जिससे दिनों-दिन मच्छरों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है, लेकिन प्रसाशन की तरफ से यहां कोई प्रयास नहीं किया गया।
- सैयद असरार अली, शाहजहांनाबाद
नगर निगम के पास 12 फागिंग मशीनें हैं। इसके लिए रूट चार्ट बनाया गया है। इसी के अनुसार शहर में फागिंग कराई जा रही है। साथ ही जलभराव वाले स्थानों से जल निकासी के प्रबंध किए जा रहे हैं। जिनके घर व संस्थान में डेंगू लार्वा मिल रहा है, उनसे जुर्माना भी वसूल रहे हैं।
- विनीत तिवारी, अपर आयुक्त नगर निगम











