वारः शनिवार, विक्रम संवतः 2081, शक संवतः 1946, माह/पक्ष : पौष मास – माघ कृष्ण पक्ष, तिथि : एकादशी तिथि शाम में 08 बजकर 32 मिनट तक रहेगी, तत्पश्चात द्वादशी तिथि रहेगी. चंद्र राशि : वृश्चिक राशि पर संचार करेगा. चंद्र नक्षत्र : पूर्ण समय ज्येष्ठा नक्षत्र होगा. योग : ध्रुव योग रात सुबह 04 बजकर 37 मिनट तक रहेगा. व्याघात योग रहेगा. सूर्योदयः सुबह 7 बजकर 16 मिनट पर होगा. सूर्यास्तः शाम 5 बजकर 50 मिनट पर होगा. राहुकालः सुबह 09 बजकर 55 मिनट से 11 बजकर 14 मिनट तक रहेगा. अभिजित् मुहूर्तः दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से 12 बजकर 54 मिनट तक रहेगा. व्रत त्यौहारः षट्तिला एकादशी I
आज का दिशा शूल
शनिवार को दिशाशूल पूर्व दिशा में रहता है (यात्रा वर्जित रहती है) यदि यात्रा करना आवश्यक हो तो सफेद तिल खाकर चौघड़िया मुहूर्त में यात्रा प्रारंभ करें .
आज के चौघड़िया मुहूर्त
- शुभ चौघड़िया – सुबह 8 बजकर 35 मिनट से 9 बजकर 55 मिनट तक
- चर चौघड़िया- दोपहर 12 बजकर 33 मिनट से 1 बजकर 52 मिनट तक
- लाभ चौघड़िया- दोपहर 1 बजकर 52 मिनट से 3 बजकर 11 मिनट तक
- अमृत चौघड़िया- दोपहर 3 बजकर 11 मिनट से 4 बजकर 30 मिनट तक
रात्रि के चौघड़िया मुहूर्त
- लाभ चौघड़िया- शाम 5 बजकर 50 मिनट से 7 बजकर 30 मिनट तक
- शुभ चौघड़िया- रात 9 बजकर 11 मिनट से 10 बजकर 52 मिनट तक
- अमृत चौघड़िया – रात 10 बजकर 52 मिनट से 12 बजकर 33 मिनट तक
- चर चौघड़िया – रात 12 बजकर 33 मिनट से 2 बजकर 13 मिनट तक
- लाभ चौघड़िया- अगली सुबह 5 बजकर 35 मिनट से 7 बजकर 16 मिनट तक
चौघड़िया मूहर्त यात्रा के लिए विशेष रूप से शुभ है और अन्य शुभ कार्यों के लिए भी शुभ है.
एकादशी व्रत के लाभ :
24 जनवरी 2025 शुक्रवार को शाम 07:25 से 25 जनवरी, शनिवार को रात्रि 08:31 तक एकादशी है।
विशेष - 25 जनवरी, शनिवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखे ।
जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।
जो पुण्य गौ-दान सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।
एकादशी करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं ।इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है ।
धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है ।
कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है ।
परमात्मा की प्रसन्नता प्राप्त होती है ।पूर्वकाल में राजा नहुष, अंबरीष, राजा गाधी आदि जिन्होंने भी एकादशी का व्रत किया, उन्हें इस पृथ्वी का समस्त ऐश्वर्य प्राप्त हुआ । भगवान शिवजी ने नारद से कहा है : एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं, इसमे कोई संदेह नहीं है । एकादशी के दिन किये हुए व्रत, गौ-दान आदि का अनंत गुना पुण्य होता है ।
एकादशी के दिन करने योग्य : एकादशी को दिया जलाके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें .......विष्णु सहस्त्र नाम नहीं हो तो १० माला गुरुमंत्र का जप कर लें l अगर घर में झगडे होते हों, तो झगड़े शांत हों जायें ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें तो घर के झगड़े भी शांत होंगे l*
एकादशी के दिन ये सावधानी रहे : महीने में 15-15 दिन में एकादशी आती है एकादशी का व्रत पाप और रोगों को स्वाहा कर देता है लेकिन वृद्ध, बालक और बीमार व्यक्ति एकादशी न रख सके तभी भी उनको चावल का तो त्याग करना चाहिए I