21 जून 2025

21 जून 2025
  • वारः शनिवार, विक्रम संवतः 2082, शक संवतः 1947, माह/पक्ष : आषाढ़ मास – कृष्ण पक्ष, तिथि: दशमी सुबह 7 बजकर 18 मिनट तक तत्पश्चात एकादशी रहेगी. चंद्र राशि: मेष राशि रहेगी. चंद्र नक्षत्रः अश्विनी शाम 7 बजकर 49 मिनट तक तत्पश्चात भरणी नक्षत्र रहेगा. योग: अतिगंड शाम 8 बजकर 28 मिनट तक तत्पश्चात सुकर्मा योग रहेगा. अभिजित मुहूर्तः सुबह 11 बजकर 31 मिनट से 12 बजकर 39 मिनट तक रहेगा. दुष्टमुहूर्तः कोई नहीं. सूर्योदयः सुबह 5 बजकर 29 मिनट पर होगा. सूर्यास्तः शाम 7 बजकर 13 मिनट पर होगा. राहूकालः सुबह 8 बजकर 55 मिनट से 10 बजकर 38 मिनट तक. तीज/त्योहार: योगिनी एकादशी ,अंतरराष्ट्रीय योग दिवस. भद्रा: नहीं है. पंचक: नहीं है.
योगिनी एकादशी तिथि : 
इस वर्ष योगिनी एकादशी 21 जून 2025 को सुबह 07:18 बजे से प्रारंभ होकर 22 जून 2025 को सुबह 04:27 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार व्रत 21 जून को ही रखा जाएगा। व्रत का पारण 22 जून दोपहर 01:47 बजे से शाम 04:35 बजे तक किया जाएगा।

योगिनी एकादशी पर पूजा का शुभ मुहूर्त : सुबह का शुभ मुहूर्त: 07:26 से 09:07 तक, अभिजीत मुहूर्त: 12:01 से 12:55 तक, दोपहर का शुभ मुहूर्त: 12:28 से 02:09 तक,  दूसरा दोपहर का शुभ मुहूर्त: 03:49 से 05:30 तक I
शुभ योग : योगिनी एकादशी 21 जून 2025 को सर्वार्थ सिद्धि योग में आ रही है, जो इसे अत्यंत शुभ और फलदायक बनाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत से विशेष लाभ मिलता है।
सर्वार्थ सिद्धि योग : एक अत्यंत शुभ योग है, जो विशेष वार और नक्षत्रों के संयोग से बनता है। इस योग में किए गए कार्यों में सफलता और सिद्धि मिलती है। यह योग किसी भी शुभ कार्य, जैसे गृह प्रवेश, व्यवसाय की शुरुआत, विवाह, या शिक्षा के आरंभ के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। जब योगिनी एकादशी सर्वार्थ सिद्धि योग में होती है, तो यह दिन विशेष रूप से पुण्य और लाभ का होता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत से सभी पापों का नाश होता है, मानसिक शांति मिलती है, और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
योगिनी एकादशी व्रत विधि : 
व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
पूजा स्थल को साफ-सुथरा करें और भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु की एकादशी कथा का पाठ करें।
दिनभर निर्जला व्रत रखें (यदि स्वास्थ्य कारण से आवश्यक हो तो जल ग्रहण किया जा सकता है)।
भगवान विष्णु के मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करें।
पूजा के समय दीपक जलाएं, तुलसी के पत्ते, अक्षत और फूल अर्पित करें।
व्रत के दिन भजन-कीर्तन या धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें।
दूसरे दिन व्रत का पारण हल्का सात्विक भोजन करके करें।
व्रत के दौरान क्रोध और नकारात्मक भावनाओं से दूर रहें।
तुलसी के पौधे की पूजा करें और उसके पत्ते जरूर चढ़ाएं।
 योगिनी एकादशी व्रत कथा : पद्म पुराण की एक कथा के अनुसार, स्वर्गलोक की अलकापुरी नामक नगरी में राजा कुबेर रहते थे, जो भगवान शिव के बहुत बड़े भक्त थे। उनके एक सेवक थे, हेम माली, जो रोज मानसरोवर से फूल लेकर आते और भगवान शिव की पूजा करते। हेम माली की पत्नी विशालाक्षी बहुत सुंदर और धर्मनिष्ठ महिला थीं। एक दिन हेम माली अपनी पत्नी के प्रेम में इतना व्यस्त हो गया कि वह समय पर फूल लेकर राजा कुबेर के पास नहीं पहुंच पाया। इससे राजा कुबेर बहुत क्रोधित हुए और उन्होंने हेम माली को कोढ़ का रोग और पत्नी से दूर रहने का श्राप दे दिया। हेम माली इस श्राप के कारण स्वर्ग से गिरकर पृथ्वी पर आ गया और कोढ़ी हो गया। उसकी पत्नी भी उससे अलग हो गई। बहुत दुखी होकर वह मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम पहुंचा और अपनी व्यथा बताई। ऋषि ने उसे सलाह दी कि वह आषाढ़ मास की कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का व्रत विधिपूर्वक करे। हेम माली ने श्रद्धा से व्रत किया और उसके सारे रोग और कष्ट दूर हो गए। वह फिर से स्वस्थ होकर अपनी पत्नी के साथ सुखी जीवन बिताने लगा।
योगिनी एकादशी पर तुलसी से जुड़े खास उपाय : भगवान विष्णु को तुलसी बहुत प्रिय हैं, इसलिए इस दिन सुबह और शाम तुलसी के पौधे की पूजा करना आवश्यक है। पूजा के दौरान तुलसी के पौधे पर लाल रंग की चुनरी या साफ-सुथरा लाल कपड़ा चढ़ाएं, यह मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। तुलसी के पौधे को मां लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है, इसलिए इस दिन उसकी विशेष रूप से आराधना करें। तुलसी के पौधे पर कलावा बांधते हुए श्रीहरि का नाम जपें, इससे भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। शाम को तुलसी के पौधे की विधिपूर्वक पूजा करें और घी का दीपक जलाएं, इससे घर से नकारात्मकता और दरिद्रता दूर होती है। तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाना, जल चढ़ाना और मंत्र जाप करना विष्णु कृपा पाने का सरल उपाय है। इसके साथ ही, पीपल के वृक्ष की पूजा करें और सात परिक्रमा करें, इससे पितृ दोष, ग्रह दोष और दरिद्रता दूर होती है।

आज का दिशा शूल

शनिवार को दिशाशूल पूर्व दिशा में रहता है (यात्रा वर्जित रहती है) यदि यात्रा करना आवश्यक हो तो सफेद तिल खाकर चौघड़िया मुहूर्त में यात्रा प्रारंभ करें.

आज के चौघड़िया मुहूर्त

  • शुभ चौघड़िया – सुबह 7 बजकर 12 मिनट से 8 बजकर 55 मिनट तक
  • चर चौघड़िया- दोपहर 12 बजकर 21 मिनट से 2 बजकर 04 मिनट तक
  • लाभ चौघड़िया- दोपहर 2 बजकर 04 मिनट से 3 बजकर 47 मिनट तक
  • अमृत चौघड़िया- दोपहर 3 बजकर 47 मिनट से 5 बजकर 30 मिनट तक

आज रात के चौघड़िया मुहूर्त

  • लाभ चौघड़िया- शाम 7 बजकर 13 मिनट से 8 बजकर 30 मिनट तक
  • शुभ चौघड़िया- रात 9 बजकर 47 मिनट से 11 बजकर 04 मिनट तक
  • अमृत चौघड़िया – रात 11 बजकर 04 मिनट से 12 बजकर 21 मिनट तक
  • चर चौघड़िया – रात 12 बजकर 21 मिनट से 1 बजकर 38 मिनट तक
  • लाभ चौघड़िया- सुबह 4 बजकर 12 मिनट से 5 बजकर 29 मिनट तक

चौघड़िया मुहूर्त यात्रा के लिए विशेष रूप से शुभ है और अन्य शुभ कार्यों के लिए भी शुभ है.

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