RBI ने कब-कब नोटों को सर्कुलेशन से बाहर किया?
यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने कोई नोट सर्कुलेशन से बाहर करने का फैसला लिया हो। भारतीय रिजर्व बैंक ने साल 1946 में 500, 1000 और 10,000 के नोटों को सर्कुलेशन से बाहर किया था। इसके बाद साल 1978 में आरबीआई ने 1000, 5000 और 10,000 के नोटों को सर्कुलेशन से बाहर किया। इसके बाद साल 2014 में एक अलग तरीके से यह कदम उठाया गया। आरबीआई ने साल 2005 से पहले छपे नोटों को मार्केट से निकाल दिया। इसके बाद आई नवंबर 2016 की नोट बंदी, जिसनें 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद कर दिया गया था।
रद्दी नोटों का क्या करती है सरकार?
इस समय 2000 के नोट बैंकों में जमा हो रहे हैं। बैंक इन नोटों को आरबीआई के रीजनल ऑफिसों में भेजेंगे। चूंकी ये नोट बेकार हो चुके हैं। ये कागज के टुकड़े से अधिक नहीं रह गए। इसलिए आरबीआई इन नोटों का निपटान इस तरह से करेगा, जिससे कोई भी इनका दुरुपयोग नहीं कर सके। पहले इन नोटों को जला भी दिया जाता था।
सबसे पहले होते हैं चेक
आरबीआई सबसे पहले इन नोटों को चेक करता है। यह पता लगाया जाता है कि ये नोट असली हैं या नकली। यह काम मशीनों से होता है। ये स्पेशल मशीनें होती हैं। ये मशीनें 60,000 करेंसी नोटों को प्रति घंटे के हिसाब से चेक करती हैं।
किये जाते हैं टुकड़े
नोटों को चेक करने के बाद इनके टुकड़े किये जाते हैं। ये टुकड़े मशीनों से ही किये जाते हैं। इनकों ठीक तरह से फाड़ा जाता है। इन्हें इस तरह से फाड़ा जाता है कि जिन पुराने नोटों में अभी भी लाइफ बाकी है, उनसे दूसरे नोट बनाकर उन्हें करेंसी सर्कुलेशन में लाया जा सके। बाकी के नोटों को इस तरह ट्रीट किया जाता है कि कभी भी कोई भी इन नोटों को रिसाइकल करके नए नोट नहीं बना सके।
बनाई जाती हैं ईंटें
नोटबंदी के समय क्या हुआ था?
साल 2016 की नोटबंदी में आरबीआई के पास बड़ी मात्रा में 500 और 1000 के नोट आए थे। आरबीआई ने पहले इन नोटों को मशीनों से रद्दी किया और फिर इस सैकड़ों टन रद्दी को रिसाइकल करने वाली कंपनी को बेच दिया। आरबीआई ने नोटों की रद्दी को केरल की एक हार्डबोर्ड बनाने वाली कंपनी को बेच दिया था। इस कंपनी का नाम वेस्टर्न इंडिया प्लायवुड लिमिटेड है। हार्डबोर्ड बनाने में लकड़ी की लुगदी के साथ नोटों की रद्दी को भी मिलाया गया था।











