*⛅तिथि - चतुर्दशी सुबह 10:35 तक तत्पश्चात पूर्णिमा*
*⛅नक्षत्र - पूर्वाफाल्गुनी प्रातः 06:19 मार्च 14 तक तत्पश्चात उत्तराफाल्गुनी*
*⛅योग- धृति दोपहर 01:03 तक तत्पश्चात शूल*
*⛅राहुकाल- दोपहर 02:19 से दोपहर 03:49 तक*
*⛅सूर्योदय - 06:54*
*⛅सूर्यास्त - 06:44*
*⛅दिशा शूल - दक्षिण दिशा में*
*⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 05:14 से प्रातः 06:02 तक,*
*⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:25 से दोपहर 01:13 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:25 मार्च 14 से रात्रि 01:13 मार्च 14 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण - होलिका दहन, हुताशनी पूर्णिमा, अट्टूकल पोंगल*
*⛅ विशेष - चतुर्दशी और पूर्णिमा के दिन स्त्री सहवास तथा तिल का तेल खाना व लगाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
*🔹होलाष्टक🔹*
*🔸होलाष्टक फाल्गुन मास के अष्टमी से शुरू होता है पूनम दिन होलिका दहन के साथ समाप्त होती है ।*
*🔸होलाष्टक से ले कर पूनम तक हिरण्यकश्यप ने भक्त प्रह्लाद को मारने के लिए कई यातनाएं दिया था । आठवां दिन हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की मदद ली थी । होलिका को यह वरदान था कि वह अग्नि में नहीं जलेगी, ऐसे में होलिका भक्त प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई । लेकिन भगवान विष्णु के आशीर्वाद से प्रह्लाद को अग्नि जला नहीं सकी, बल्कि होलिका इस अग्नि में जलकर भस्म हुई । यह सारी घटना उन्हीं आठ दिनों में हुई थी । जिन्हें होलाष्टक के नाम से जाना जाता है ।*
*🔸इस आठ दिनों की अवधि को अशुभ माना जाता है । इस अवधि में किसी भी शुभ कार्य के लिए वर्जित माना जाता है ।*
*🔹होलाष्टक में वर्जित कार्य :🔹*
*1. विवाह करना ।*
*2. वाहन खरीदना ।*
*3. घर खरीदना ।*
*4. भूमि पूजन ।*
*5. गृहप्रवेश ।*
*6. 16 संस्कार ।*
*7. यज्ञ, हवन या होम ।*
*8. नया व्यापार शुरु करना ।*
*9. नए वस्त्र या कोई वस्तु खरीदना ।*
*10. यात्रा करना ।*
*🔸होलाष्टक के वक्त लोगों को सदाचार और संयम का पालन करना चाहिए । इसके अलावा इन दिनों में भगवान को याद करके मंत्र जप, साधना और आध्यात्मिक कार्य करना चाहिए । इस समय के अवधि साधना और सिद्धि के लिए काफी अनुकूल माना गया है .
चैत्र नवरात्रि -*तप की शक्ति का प्रतीक है मां ब्रह्मचारिणी*🙏🏻 *नवरात्रि की द्वितीया तिथि पर मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। देवी ब्रह्मचारिणी ब्रह्म शक्ति यानी तप की शक्ति का…