'MRP 10 गुना, यह दिनदहाड़े डकैती'; कैंसर की महंगी दवाओं पर भड़का सुप्रीम कोर्ट; कहा- यह पूरी तरह बेलगाम स्थिति
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23 Sep 2026, 11:43 AM
नई दिल्ली: कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली जरूरी दवाओं की कीमतों में भारी अंतर पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने एक ऐसी दवा का उदाहरण दिया, जिसका अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) 27,000 रुपये छपा था, जबकि वही दवा रिटेलर को महज 2,700 रुपये में उपलब्ध कराई जा रही थी। कोर्ट ने इसे मरीजों के साथ दिनदहाड़े डकैती करार दिया।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि मरीजों से इस तरह अधिक कीमत वसूलना बेहद गंभीर मामला है। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि जिन अधिकारियों को ऐसी अनियमितताओं पर कार्रवाई करनी चाहिए, वे इस मामले में चुप क्यों है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'यह बिल्कुल चौंकाने वाली बात है कि जरूरी कैंसर की दवा का MRP 27,000 रुपये है, जबकि रिटेलर को यह 2,700 रुपये में दी जा रही है। रिटेलर को दी जाने वाली कीमत से MRP 10 गुना है।' कोर्ट ने कहा कि अगर यह जबरन वसूली नहीं है तो और क्या है?MRP तय करने का मुद्दा अहम
एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि उनकी याचिका में पजीकृत डॉक्टरो द्वारा मरीजों को जेनेरिक दवाएं लिखने से जुड़े मुद्दे को भी उठाया गया है। उन्होंने कहा कि दवाओं का MRP तय करने का सवाल बेहद महत्वपूर्ण है।यह समझ से परे है कि जिन सरकारी अधिकारियों की जिम्मेदारी ऐसी कीमतों और अनियमितताओं पर कार्रवाई करने की है, वे इस मुद्दे पर चुप है। यह पूरी तरह बेलगाम स्थिति है।
सुप्रीम कोर्ट
29 को अगली सुनवाई
दवा कंपनियों और रिटेलरों द्वारा जरूरी दवाओं की कथित अनुचित कीमत वसूली रोकने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है। आगे की सुनवाई 29 सितंबर को होगी।दवा के दाम कैसे तय हो रहे ?
सुप्रीम कोर्ट ने जो कहा है, उससे दवा के दाम तय करने की व्यवस्था पर सवाल खड़े होते है। MRP और रिटेलर के बीच दस गुना अंतर बताता है कि सप्लाई चेन में दाम के कई स्तर है। यानी कीमत तय करने की व्यवस्था पारदर्शी नहीं है। इस मामले में निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े होते है।