विक्रम संवतः - 2082
शक संवतः - 1947
आयनः - दक्षिणायण
ऋतुः - शरद ऋतु
मासः - पौष माह
पक्षः - शुक्ल पक्ष
तिथिः - पूर्णिमा तिथि 15:32:00 तक तदोपरान्त प्रतिपदा तिथि
तिथि स्वामीः - पूर्णिमा तिथि के स्वामी चन्द्र देव हैं तथा प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देव हैं।
नक्षत्रः - आद्रा नक्षत्र 17:27:00 तक तदोपरान्त पुनर्वसु नक्षत्र
नक्षत्र स्वामीः - आद्रा नक्षत्र के स्वामी राहु जी हैं तथा पुनर्वसु नक्षत्र के स्वामी गुरू देव जी हैं।
योगः - ब्रह्म योग 09:03:00 तक तदोपरान्त इन्द्र योग
गुलिक कालः - शुभ गुलिक काल सुबह 06:53:00 से 08:11:00 तक
दिशाशूलः - आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से अदरक खाकर जायें।
राहुकालः - आज का राहु काल 09:30:00 से 10:48:00 तक
तिथि का महत्वः - इस तिथि में घी नही खाना चाहिए यह तिथि रत्न धारण, शिल्प कार्य और आभूषण धारण करने के लिए शुभ है।
“हे तिथि स्वामी, दिन स्वामी, योग स्वामी, नक्षत्र स्वामी आप पंचांग का पाठन करने वालों पर अपनी कृपा दृष्ट बनाये रखना।”











